Sat. Dec 7th, 2019

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट देश का पहला हाईकोर्ट, जहाँ हिंदी में मिलेगी फैसले की प्रतिलिपि

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ राज्य का बिलासपुर हाईकोर्ट देश का पहला हाईकोर्ट बन गया है जहाँ फैसले की प्रतिलिपि हिंदी में मिलेगी | इसके अलावा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लगभग 8 साल पहले से ही हिंदी में पैरवी की अनुमति है| इस फैसले से पक्षकारो को राहत मिली है जो अंग्रेजी नहीं समझ पाते थे| छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से 10 दिन तक के लिए कनेक्टिंग टू सर्व कार्यक्रम चल रहा है| इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए जस्टिस राधाकृष्णन ने कहा कि हाईकोर्ट की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है लेकिन पक्षकारो के सहूलियत के लिए उन्हें यह जानकारी हिंदी में भी मिलने चाहिए, जिसे वे आमतौर पर समझते है| इसलिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंग्रेजी में दिए जाने वाले फैसलों को हिंदी में देने की तैयारी कर दी है| इस मौके पर प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर ने कहा की समाज के कमजोर वर्ग को न्याय का समान अवसर देने के लिए सन् 1995 में 9 नवम्बर को ही विधिक सेवा शुरू की गयी| इसलिए हम इस दिन को जन्मदिन की तरह आयोजित करते है| उन्होंने आगे कहा कि हमें विधिक सेवा के लिए नए संकल्प लेने है| हमें अपने व्यवसाय के अलावा विधिक सेवा के लिए समय निकालना है केवल अदालती मामले में सहायता नहीं बल्कि,  मानसिक अस्वस्थ, आदिवासी, महिला, बच्चो और असमर्थो को शासन की कल्याणकारी योजनाओं  का लाभ दिलाना इसका मकसद है|

रजिस्ट्रार जनरल गौतम ने भी इस सभा को संबोधित करते हुए कहा कि, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट हिंदी में फैसले की प्रतिलिपि प्रदान करने वाला देश का पहला हाईकोर्ट बन गया है| हिंदी रूपांतरण प्राप्त करने के लिए पक्षकार को न्यूनतम शुल्क देना होगा, तब उसे फैसले की प्रतिलिपि हिंदी में मिल जाएगी। विधिक सेवा दिवस के के अवसर पर एनएसएस, सीएमडी कॉलेज, लॉ के छात्रों और पैलालीगल वालेंटियर्स की ओर से एक रैली भी निकाली गई| राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर लोगों को कानूनी सहायता पहुंचाने के लिए 18 नवंबर तक के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में लीगल असिस्टेंस डेस्क की स्थापना भी की गई है। साथ ही इस दिन एक दिव्यांग सहायक शिक्षक तारकेश्वर को निशुल्क सहायता दी गई|

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