प्रश्नों के घेरे में ‘पत्रकारिता’ : कौन तय करता है असली पत्रकार?
पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर अख़बार इस स्तंभ की मर्यादा निभा रहा है? हाल ही में जनवंधु जैसे स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित एक सामग्री में जिस तरह से व्यक्तिगत टिप्पणियों और लेबलिंग के ज़रिये एक महिला पत्रकार की छवि पर सवाल खड़े किए गए, उसने मीडिया की भूमिका पर गंभीर बहस खड़ी कर दी है।किसी व्यक्ति को "फर्जी पत्रकार" कह देना क्या आज की पत्रकारिता का नया ट्रेंड बन चुका है? और उससे भी बड़ा सवाल — क्या किसी अख़बार को यह अधिकार है कि वह तय करे कि कौन असली पत्रकार है और कौन नहीं?जानकारी के अनुसार, जिस महिला पत्रकार पर सवाल उठाए गए, उनके पास पत्रकारिता से संबंधित विधिवत डिग्री है और वे लंबे समय से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इसके बावजूद, बिना किसी आधिकारिक पुष्टि, बिना पक्ष जाने, एकतरफा ढंग से उनकी पहचान पर सवाल उठाना न सिर्फ़ असंवेदनशील है, ब...









