बिंजकोट-दर्रामुड़ा में SEML कंपनी की सड़क निर्माण में ठेकेदार की घोर लापरवाही, PMGSY सड़क उखाड़कर छोड़ दी, रात में धूल और गड्ढों से ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त, कोई साइन बोर्ड नहीं, काम कछुए की गति से, कंपनी प्रबंधन भी सोया हुआ

रायगढ़, 25 मार्च 2026। खरसिया के बिंजकोट-दर्रामुड़ा गांव में रहने वाले लोग सालों से एक ही सपना देख रहे थे – कंपनी के मेन गेट से बाजार चौक, दर्रामुड़ा, जामपाली फाटक होते हुए कुर्रूभांठा तक की सड़क बन जाए। धूल-धक्कड़, गड्ढों और कीचड़ में फंसकर रोजाना परेशान रहने वाले ग्रामीणों ने बार-बार आवाज उठाई। आखिरकार करोड़ों रुपये की स्वीकृति मिल गई और सड़क बनने की तैयारी शुरू हो गई। मेसर्स सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड (SEML) कंपनी ने खरसिया के राकेश गर्ग को ठेका दे दिया। काम शुरू भी हो गया। ग्रामीणों ने सोचा कि अब उनकी मुसीबत खत्म हो जाएगी। लेकिन ठेकेदार की लापरवाही ने सारा माहौल बिगाड़ दिया।

ग्रामीण बताते हैं कि सबसे पहले तो ठेकेदार ने पुरानी प्रधानमंत्री सड़क (PMGSY) को उखाड़ फेंका। बिना किसी तैयारी के, बिना किसी चेतावनी के। अब वह रास्ता पूरी तरह खुला और खतरनाक हो गया है। भारी वाहन रोजाना आते-जाते हैं। ट्रक, ट्रैक्टर, बस – सब गुजरते हैं। दिन में तो किसी तरह गुजर जाता है, लेकिन रात में हालत बहुत खराब हो जाती है। अंधेरे में गड्ढे नजर नहीं आते, धूल उड़ती है, पैदल चलने वाले, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग खास तौर पर परेशान हैं। एक ग्रामीण ने बताया, “रात को निकलना मुश्किल हो गया है। धूल से सांस लेना दूभर हो जाता है। बच्चे स्कूल से लौटते समय डरते हैं।”

ठेकेदार राकेश गर्ग ने काम शुरू तो कर दिया, लेकिन गति कछुए जैसी है। आरसीसी रोड बननी है, बड़ा काम है, फिर भी रोज थोड़ा-थोड़ा करके काम चल रहा है। ग्रामीण कहते हैं कि ठेकेदार ने न तो कोई साइन बोर्ड लगाया, न कोई बैरिकेडिंग की, न कोई सावधानी बरती। हादसे की आशंका हर वक्त बनी रहती है। कोई भी गाड़ी अनियंत्रित हो जाए तो बड़ा नुकसान हो सकता है। लोग पूछते हैं – काम मिल गया तो ठीक से क्यों नहीं कर रहे? सिर्फ सड़क उखाड़कर छोड़ दिया है, पूरा काम कब पूरा होगा, इसका कोई अंदाजा नहीं।

कंपनी की तरफ से ठेका दिया गया था, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब कंपनी प्रबंधन को भी इसकी चिंता नहीं दिख रही। सिविल विभाग के अधिकारी जैसे कुम्भकरण की नींद में सो रहे हैं। ठेकेदार को काम जल्दी पूरा करने के लिए कोई दबाव नहीं। ग्रामीण चाहते हैं कि सड़क बने, लेकिन इस तरह लापरवाही से नहीं। वे कहते हैं, “हमने इतने साल इंतजार किया, अब जब काम शुरू हुआ तो ठेकेदार इसे बिगाड़ रहा है।”

फिलहाल गांववासी सिर्फ एक ही बात चाहते हैं – सड़क बन जाए, चाहे जितना भी समय लगे, लेकिन सही तरीके से और जल्दी। ठेकेदार राकेश गर्ग से सवाल है – सड़क उखाड़कर छोड़ दिया, चेतावनी के निशान तक नहीं लगाए, काम इतना धीमा क्यों? कंपनी प्रबंधन से भी पूछना बनता है – ठेका देने के बाद क्या निगरानी नहीं रखनी चाहिए? क्या ग्रामीणों की परेशानी उनकी नजर में नहीं आ रही? अब देखना होगा कि दोनों पक्ष क्या जवाब देते हैं। लेकिन ग्रामीणों की एक ही गुहार है – सड़क बननी चाहिए, जल्दी और सही ढंग से।