धान खरीदी में बड़ा खेल! बानीपाथर केंद्र में किसानों से 2–3 किलो ज्यादा तौल, क्या प्रबंधक पर गिरेगी गाज?

  • 40.600 किलो के बजाय 43 किलो तौल का आरोप, विरोध करने पर किसानों को धमकी — प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

रायगढ़ :- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की खरसिया तहसील के अंतर्गत ग्राम बानीपाथर स्थित धान खरीदी केंद्र में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां प्रबंधक द्वारा धान की तौल में गंभीर हेराफेरी की जा रही है, जिससे गरीब किसानों का सीधा नुकसान हो रहा है। किसानों के अनुसार, सरकारी नियम के मुताबिक प्रति बोरी धान 40 किलो 600 ग्राम तौला जाना चाहिए, लेकिन मंडी प्रबंधक जानबूझकर 43 किलो तक तौल कर रहे हैं। जब किसान विरोध करते हैं तो तौल वापस करने से मना कर दिया जाता है और उन्हें धमकाया जा रहा है कि “या तो यही तौल स्वीकार करो या धान लेकर घर जाओ”।

यह घोटाला तब उजागर हुआ जब कई किसानों ने अपनी बोरी में ज्यादा वजन की बात मीडिया को बताई और मीडिया के सामने केंद्र के कांटे पर जांच की। नतीजा चौंकाने वाला था – प्रति बोरी में 2 से 3 किलो तक का फर्क सामने आया। इससे किसानों को प्रति क्विंटल सैकड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, जबकि मंडी प्रबंधक और कुछ कर्मचारी मिलकर इस हेराफेरी से मोटी कमाई कर रहे हैं। एक प्रभावित किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम मेहनत से धान उगाते हैं, सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने आते हैं, लेकिन यहां हमारे ही हक पर डाका डाला जा रहा है। विभाग वाले ढोल पीटते हैं कि पारदर्शिता है, सीसीटीवी है, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं।”

यह मामला छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सीजन 2025-26 के दौरान सामने आए कई घोटालों की कड़ी में जुड़ता है। राज्य सरकार ने हाल ही में अनियमितताओं पर सख्ती दिखाते हुए 12 जिलों में 38 कर्मचारियों पर कार्रवाई की है – जिसमें 31 निलंबन, 3 पर एफआईआर और एक की सेवा समाप्ति शामिल है। रायगढ़ जिला भी इन प्रभावित जिलों में शामिल है, जहां स्कंध कमी, अमानक धान खरीदी और अन्य गड़बड़ियों के मामले पकड़े गए हैं।

सवाल यह है:
आखिर संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन कब तक चुप्पी साधे बैठा रहेगा? क्या बानीपाथर जैसे केंद्रों पर तत्काल जांच टीम नहीं भेजी जानी चाहिए? क्या कांटों की जांच, सीसीटीवी फुटेज और किसानों के बयान दर्ज नहीं होने चाहिए?

किसान संगठनों ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अन्यथा, किसानों का विश्वास सरकार की ‘किसान हितैषी’ नीतियों पर और कमजोर होगा।

प्रशासन से अपेक्षा है कि वह तुरंत संज्ञान ले और बानीपाथर धान मंडी में पारदर्शी तौल सुनिश्चित करे, ताकि किसान का एक-एक दाना सुरक्षित रहे।