
रायगढ़। धान खरीदी के अंतिम दिनों में वास्तविक किसान परेशान हो रहा है। भौतिक सत्यापन के लिए इतनी लंबी प्रक्रिया कर दी गई है कि किसान चक्कर लगाते-लगाते थक रहा है लेकिन टोकन नहीं कट रहे। ऐसी कई समस्याओं को लेकर खरसिया विधायक सोमवार को कलेक्टोरेट पहुंचे। वहां एडीएम और खाद्य अधिकारी से चर्चा के बाद जल्द समाधान करने का आश्वासन मिला। धान खरीदी को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सभी जिलों में सख्ती करने का आदेश दिया है, लेकिन इसका नुकसान वास्तविक किसानों को भी हो रहा है।
सोमवार को खरसिया विधायक उमेश पटेल किसानों की समस्या लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे थे। अपर कलेक्टर अपूर्व प्रियेश टोप्पो और प्रभारी खाद्य अधिकारी चितरंजन सिंह से लंबी चर्चा हुई। उमेश पटेल ने कहा कि प्रत्येक समिति में टोकन की लिमिट तय कर दी गई है, जबकि वहां सैकड़ों किसानों का धान खरीदा जाना है। किसान के घर में धान का अंबार लगा है। ज्यादातर बड़े किसान ही हैं। कई किसान एक बार भी धान नहीं बेच सके हैं। भौतिक सत्यापन के बाद भी टोकन नहीं कटने के कारण धान नहीं बेच पा रहे हैं। दबाव डालकर रकबा समर्पण कराया जा रहा है। एडीएम ने कहा कि शनिवार और रविवार को कुछ तकनीकी कारणों से टोकन नहीं कट सके। उन्होंने उमेश पटेल से कहा कि सोमवार शाम तक सभी के टोकन कट जाएंगे। दूसरी समस्या सत्यापन की – है।
मौके पर मौजूद किसानों ने कहा कि पहले आवेदन देने के बाद पटवारी बड़ी मुश्किल से सत्यापन करने आ रहा है। इसके बाद तहसीलदार से अनुमति नहीं मिल रही है। किसान अपना आवेदन लेकर तहसील पहुंच रहा है तो वहां तहसीलदार गायब हैं। कई दिन चक्कर लगाने के बाद किसी का सत्यापन हो भी गया टोकन नहीं कट रहा है। टोकन कटने के बाद दोबारा सत्यापन हो रहा है। इसे बहुत परेशानी हो रही है। एडीएम का कहना था कि किसी भी किसान को तहसील आने की जरूरत नहीं है। समिति में आवेदन देने के बाद बाकी प्रक्रिया स्वतः होगी।
मोटा धान देखकर कह रहे ओडिशा का है
किसानों ने कहा कि ओडिशा में धान की एक वेरायटी जमुना को रायगढ़ में भी कई किसानों ने लगाया है क्योंकि उसका उत्पादन अच्छा है। समिति में धान को ओडिशा का कहकर रिजेक्ट किया जा रहा है। इस समस्या को सुलझाने की मांग की गई है। उमेश पटेल ने कहा कि प्रबंधकों को सरकार ने धान नहीं खरीदने का आदेश दिया है। वे भी मजबूर हैं। पटवारी भी मजबूर होकर भौतिक सत्यापन कर रहा है और रकबा समर्पण के लिए किसान को बाध्य किया जा रहा है।
पहले उत्पादन कम करने का किया प्रयास
उमेश पटेल ने कहा कि धान खरीदने के बजाय किसानों को परेशान किया जा रहा है। भौतिक सत्यापन के बाद भी धान नहीं बेच पा रहे हैं। अभी केवल वो किसान बाकी हैं जिनके पास ज्यादा मात्रा में धान है। पहले खाद आपूर्ति को कम किया ताकि उत्पादन कम हो। अब धान भी नहीं खरीद रहे हैं। अभी मुश्किल से 9 दिन बचे हैं, प्रबंधक कह रहे हैं कि उनको ऊपर से धान नहीं खरीदने का आदेश है।
कम धान खरीदने का मॉडल बना रहे रायगढ़ को
उमेश पटेल ने कहा कि पूरे प्रदेश में यही स्थिति है, लेकिन रायगढ़ में कुछ ज्यादा ही हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि रायगढ़ जिले को कम धान खरीदी का मॉडल बनाया जा रहा है। कई किसानों का एक बार भी टोकन नहीं कटा है। जिसका एक टोकन हो गया, उसको दूसरा-तीसरा टोकन जारी करने से मना किया जा रहा है। असली किसान को क्यों रोक रहे हैं।

