बड़ी कामयाबी! छत्तीसगढ़ में 2025 के पहले तिमाही में सरेंडर करने वाले नक्सली हुए दोगुने

छत्तीसगढ़ में 2025 की पहली तिमाही में नक्सलियों के सरेंडर करने की संख्या पिछले साल तकी तुलना में डबल हुई हैं। छत्तीसगढ़ के सबसे कठिन लड़ाई वाले इलाके में नक्सलियों को हथियार डालने के लिए मनाने के लिए सीआरपीएफ ने अपनी खुफिया शाखा को सक्रिय किया है। अर्धसैनिक बल की ओर से अपनी जासूसी इकाई को जारी एक निर्देश में ‘जन मिलिशिया’ और क्रांतिकारी जन समितियों (RPC) के सदस्यों और उनके समर्थकों को पहचानने का काम सौंपा गया है,जिसका लक्ष्य भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (Maoists) की मुख्यधारा के आदर्शों के प्रति धारणाओं को बदलना है।

इसमें खुफिया शाखा के कर्मियों से स्थानीय लोगों के साथ जुड़ने,उन्हें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (Maoists) के कैडरों को आत्मसमर्पण करने और उनकी विचारधारा को त्यागकर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने में भूमिका निभाने के लिए कहा गया है। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा मार्च 2026 तक देश से वामपंथी उग्रवाद (LWE) को खत्म करने की घोषणा को देखते हुए उठाया गया है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई को छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के आत्मसमर्पण का आधिकारिक डेटा मिला है,जिससे पता चलता है कि 2024 के पहले तीन महीनों (जनवरी-मार्च) में 124 खूंखार (इनामी नक्सली),बिना इनाम वाले कैडर और’जन मिलिशिया’सदस्यों ने अपने हथियार या विचारधारा छोड़ दी थी,जबकि इस साल इसी अवधि में यह संख्या बढ़कर 280 हो गई।
साल 2024 में कुल 787 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया,जिनमें से ज्यादातर आत्मसमर्पण केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और उसकी विशेष कमांडो इकाई कोबरा द्वारा किए गए मुठभेड़ों के कारण हुए। सीआरपीएफ छत्तीसगढ़ में तैनात लगभग 20 पूर्ण बटालियनों के साथ मुख्य नक्सल विरोधी अभियान बल है और कोबरा इकाई को विशिष्ट खुफिया-आधारित अभियान चलाने का आदेश दिया गया है। ऐसी प्रत्येक बटालियन में खुफिया जानकारी जुटाने और विश्लेषण के लिए एक समर्पित इकाई होती है।
सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बल पिछले कुछ महीनों से तीन-तरफा रणनीति पर काम कर रहा है। उनका काम दूरस्थ ठिकाने स्थापित करने सहित नक्सल विरोधी अभियान, नागरिक शिविर शुरू करना और आत्मसमर्पण की संख्या में वृद्धि करना। अधिकारी ने कहा कि अधिक आत्मसमर्पण का मतलब कम हिंसा है। सीआरपीएफ का अधिक आत्मसमर्पण करवाना स्वाभाविक है क्योंकि यह राज्य पुलिस इकाइयों और अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की तुलना में छत्तीसगढ़ सहित वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर तैनात है। शनिवार को दंतेवाड़ा जिले में 15 नक्सलियों ने सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया।
एक दूसरे अधिकारी ने कहा,”इन 15 लोगों में से सात ने सीआरपीएफ की खुफिया शाखा द्वारा राष्ट्र के बेहतर हित के लिए मुख्यधारा में शामिल होने के लाभों पर लगातार प्रयासों, निरंतर परामर्श और जानकारी देने के माध्यम से आत्मसमर्पण किया।”केंद्र सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार,देश में माओवादी हिंसा में 81 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि नागरिकों और सुरक्षा बलों की मौतों में 85 प्रतिशत की कमी आई है।