खरसिया ने नम आंखों से अपने जननायक नंदकुमार पटेल और बलिदानी दिनेश पटेल को किया नमन

पिता के अधूरे सपनों को साकार करने का है संकल्प – उमेश पटेल

खरसिया। 25 मई 2013… छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह काला दिन जिसे कोई भी प्रदेशवासी शायद ही कभी भुला पाए। बस्तर की झीरम घाटी में लोकतंत्र को लहूलुहान कर देने वाले उस दर्दनाक नक्सली हमले को आज 13 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह वह भीषण हमला था जिसमें कांग्रेस पार्टी ने एक ही झटके में अपना पूरा शीर्ष नेतृत्व खो दिया था। इस नरसंहार में दिग्गज नेताओं, कार्यकर्ताओं और जवानों सहित लगभग 30 लोगों की शहादत हुई थी, जिनमें खरसिया के माटीपुत्र, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष स्व. नंदकुमार पटेल और उनके युवा सुपुत्र दिनेश पटेल भी शामिल थे।

राजनीति के पटल पर ‘पटेल जी’ जैसे जननायक विरले ही होते हैं। उनके जैसे नेता सदियों में एकाध बार ही जन्म लेते हैं और सीधे जनता के दिलों पर राज करते हैं। आज उनकी 13वीं पुण्यतिथि पर खरसिया के लोगों की भावनाएं हिलोरें मार रही हैं और पूरा अंचल अपने नेता की याद में भावुक हो उठा है। सड़क से लेकर सदन तक जनता की आवाज बुलंद करने वाले नंदकुमार पटेल केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जन-जन के नेता थे। जब वे ‘परिवर्तन यात्रा’ का नेतृत्व कर रहे थे, तब उनकी लोकप्रियता और संघर्ष ने पूरे प्रदेश में एक नई ऊर्जा भर दी थी। झीरम घाटी में पिता के साथ आखिरी सांस तक डटे रहने वाले दिनेश पटेल की शहादत को याद कर आज भी खरसिया वासियों का गला रुंध जाता है। उनके जाने का असीम दुख आज भी रायगढ़ जिले और खासकर खरसिया के लोगों के दिलों में एक गहरी टीस बनकर चुभता है।

आज सोमवार, 25 मई को ‘झीरम श्रद्धांजलि दिवस’ के अवसर पर समूचे खरसिया क्षेत्र में विविध गरिमामय व सेवाभावी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सुबह से ही उनके गृह ग्राम नंदेली स्थित ‘शांति बगिया’ समाधि स्थल पर लोगों का भारी तांता लगा रहा। क्षेत्रीय विधायक और स्व. पटेल के सुपुत्र उमेश पटेल ने अपने परिजनों, वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं और भारी संख्या में उपस्थित आमजनों के साथ पिता व भाई की समाधि पर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें सादर नमन किया। इस दौरान समाधि स्थल पर आयोजित सुंदरकांड पाठ की चौपाइयों के बीच माहौल बेहद गमगीन और आध्यात्मिक नजर आया।

शहीद पटेल की याद में आज खरसिया का कोना-कोना उनके सेवा और समर्पण के संस्मरणों से जीवंत हो उठा। मदनपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यहाँ कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने स्व. नंदकुमार पटेल के जमीनी जुड़ाव, उनके कड़े संघर्षों और संगठन कौशल को याद किया। इस दौरान विधायक उमेश पटेल अपने पिता और बड़े भाई के उन संघर्षों और क्षेत्र की जनता के प्रति उनके अगाध प्रेम का जिक्र करते हुए बेहद भावुक हो गए। उमेश पटेल ने कहा कि, “शहीद पिता नंदकुमार पटेल के अधूरे सपनों को साकार करने के लिए हम दृढ़ संकल्पित हैं।” विधायक पटेल ने कहा कि 25 मई 2013 का दिन न केवल खरसिया बल्कि समूचे प्रदेश कांग्रेस के लिए काला दिन था। उस दिन झीरम घाटी नक्सली हमले में मेरे पिता नंदकुमार पटेल, भाई दिनेश पटेल, महेन्द्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल सहित लगभग 30 लोगों की शहादत हुई थी। अपने पिता को नमन करते हुए उमेश पटेल ने कहा कि उनके पिता ने खरसिया को एक आदर्श विधानसभा क्षेत्र बनाने के लिए अपने जीवन का प्रत्येक क्षण ग्राम, गरीब, मजदूर और किसानों की सेवा में लगाया था। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना ही हमारी तरफ से उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कार्यक्रम में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ग्रामीण और शहर के नेताओं एवं कार्यकर्ताओ ने शहीद नंदकुमार पटेल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके पश्चात, ठुसेकेला के बारातोरहीन दाई चौक पर स्थापित शहीद नंदकुमार पटेल एवं दिनेश पटेल की आदमकद प्रतिमाओं पर विधायक उमेश पटेल सहित बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने माल्यार्पण कर अपनी भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की।

सेवा कार्यों में दिखी जनसेवा की झलक
राजनीतिक और सामाजिक जीवन में जनसेवा को ही अपना धर्म मानने वाले नंदकुमार पटेल की पुण्यतिथि पर आज मानवता की अनूठी मिसाल भी देखने को मिली। सुबह ठीक 10 बजे खरसिया के शासकीय अस्पताल में युवा कांग्रेस और खरसिया कांग्रेस परिवार के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से आत्मीय मुलाकात की तथा उन्हें फल वितरित किए। इसके पश्चात रेस्ट हाउस के सामने स्थित शहीद नंदकुमार पटेल स्मारक स्थल पर खरसिया कांग्रेस परिवार द्वारा एक विशाल महाभंडारे का आयोजन किया गया। इस महाभंडारे में हजारों की संख्या में पहुंचे आम नागरिकों, क्षेत्रवासियों और राहगीरों ने पूरी श्रद्धा के साथ मूंग भात, कढ़ी एवं पचमेली सब्जी का प्रसाद ग्रहण किया। स्मारक स्थल पर लगी अपने शहीद पिता की आदमकद प्रतिमा के समक्ष नतमस्तक होकर विधायक उमेश पटेल ने जनसेवा का वह संकल्प दोहराया जो उनके पिता ने देखा था। दिनभर चले इन आयोजनों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भले ही झीरम की उस साजिश ने शहीद नंदकुमार पटेल और दिनेश पटेल को हमसे छीन लिया हो, लेकिन खरसिया की माटी और यहां के लोगों का प्यार इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वे आज भी जनता के दिलों में अमर हैं और हमेशा रहेंगे।