
रायगढ़। राजनीति में जब निष्ठा और निरंतरता का संगम होता है, तो परिणाम पद और प्रतिष्ठा के रूप में सामने आते हैं। रायगढ़ कांग्रेस के उभरते हुए युवा हस्ताक्षर तरुण गोयल की हालिया नियुक्ति इसी सच्चाई की तस्दीक करती है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने तरुण को रायगढ़ शहर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से (मंडल-2, शहर मध्य) का अध्यक्ष नियुक्त कर यह साफ कर दिया है कि संगठन में पसीने की कीमत आज भी सर्वोपरि है।
चुनावी नतीजों से ऊपर है ‘मैदान’ की सक्रियता
तरुण गोयल उन चुनिंदा नेताओं में से नहीं हैं जो सिर्फ चुनावी मौसम में नजर आते हैं। उनकी राजनीति का आधार ‘सड़क’ है। धरना, प्रदर्शन, आंदोलन या वार्ड स्तर की छोटी से छोटी बैठक, रायगढ़ में कांग्रेस का झंडा थामे तरुण गोयल की उपस्थिति एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी छवि एक ऐसे साथी की है जो हर सुख-दुख में सहज उपलब्ध रहता है।
वार्ड 19 का वो ‘ऐतिहासिक’ मोर्चा
तरुण के राजनीतिक सफर का जिक्र होते ही पिछले नगर निगम चुनाव का वो रोमांचक अध्याय स्वतः ही सामने आ जाता है। वार्ड नंबर 19 में अपनी धर्मपत्नी श्रीमती शालू गोयल के लिए उन्होंने जो बिसात बिछाई, उसने सत्ताधारी भाजपा के दिग्गजों को भी पसीने ला दिए थे। “यह सिर्फ एक पार्षद पद का चुनाव नहीं था, बल्कि एक युवा कार्यकर्ता और सत्ता के बड़े रसूखदारों के बीच की सीधी भिड़ंत थी। भले ही परिणाम पक्ष में न रहे हों, लेकिन तरुण ने अपनी राजनीतिक रणनीति से यह साबित कर दिया कि वे लंबी रेस के खिलाड़ी हैं।”
उमेश पटेल के विश्वसनीय हैं तरुण
रायगढ़ की राजनीति में यह जगजाहिर है कि तरुण गोयल, पूर्व कैबिनेट मंत्री और विधायक उमेश नंदकुमार पटेल के सबसे भरोसेमंद सिपाहियों में से एक हैं। उमेश पटेल का ‘वरदहस्त’ उनकी सबसे बड़ी ताकत है। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को दरकिनार कर संगठन को प्राथमिकता देना ही उन्हें उमेश पटेल की कोर टीम का अहम हिस्सा बनाता है। मंडल-2 (शहर मध्य) का अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद तरुण गोयल ने सादगी के साथ अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने इसे पद नहीं बल्कि ‘कार्यकर्ताओं का सम्मान’ बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहर के मध्य क्षेत्र की जिम्मेदारी तरुण को मिलने से न केवल युवाओं का जुड़ाव बढ़ेगा, बल्कि संगठन में एक नई आक्रामकता भी देखने को मिलेगी।

