तानसेन के वंशज अब्दुल रशीद खान, जिनकी आवाज़ सुन बरसने लगते थे बादल
नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। ये ज़मीं बनती गई, ये आसमां बनता गया, मैं एक कदम रखता गया और ये जहां बनता गया। ऐसे ही अपने गीतों से लोगों को दीवाना बनाया शास्त्रीय गायक उस्ताद अब्दुल रशीद खान ने। गायिकी की दुनिया में उन्होंने लगभग 100 साल का सफर पूरा किया। खास बात ये है कि चलने-फिरने में तकलीफ होने के बावजूद भी उस्ताद अब्दुल रशीद खान सार्वजनिक प्रस्तुति देते रहे और रियाज में भी कोई कमी नहीं छोड़ी। उस्ताद अब्दुल रशीद खान उत्तर प्रदेश के रायबरेली में पैदा हुए प्रसिद्ध भारतीय गायकों में से एक थे। अब्दुल साहब को रसन पिया के नाम से भी जाना जाता था। अब्दुल रशीद का घराना कई संगीतकारों से भरा हुआ था। उन्होंने अपने बुजुर्गों जैसे चांद खान, बरखुरदार खान और महताब खान जैसे दिग्गजों से गायिकी की शुरुआती तालीम ली। करीब 100 साल तक गायिकी की दुनिया में बेमिसाल किरदार रशीद खान ने जिंदगी के अंतिम लम्हों तक रि...










