‘सरपंच’ से लेकर ‘सूबे की सूबेदारी’ तक विलासराव देशमुख ने तय किया सफर, जानें सियासी फलक पर छा जाने की कहानी
नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। गांव के सरपंच से लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय करने वाले विलासराव देशमुख चुनौतियों को अवसर में बदलने वाले राजनेता के तौर पर जाने जाते थे। 26 मई 1945 को लातूर जिले के बाभलगांव में जन्मे विलासराव देशमुख मराठा समुदाय से थे। पुणे विश्वविद्यालय से विज्ञान और कला में डिग्री लेने के बाद उन्होंने आईएलएस लॉ कॉलेज में कानून की पढ़ाई की।विलासराव देशमुख 1974 से 1976 तक बाभलगांव के सरपंच, उस्मानाबाद जिला परिषद के सदस्य और लातूर तालुका पंचायत समिति के उपाध्यक्ष रहे। 1975 से 1978 तक उस्मानाबाद जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन के 5 सूत्री कार्यक्रम को जोरदार तरीके से लागू किया। देशमुख 1980 में पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए और इसके बाद 1985 और 1990 में भी जीत हासिल की। उन्होंने 1982 से 1995 के बीच राज्य में मंत्री के रूप...










