
रायगढ़। ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण सुरक्षा को मजबूत करने, टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एनटीपीसी लारा ने एक सराहनीय कदम उठाया है। कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत ग्रामीण परिवारों को ताजे फल और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक वृहद पौध वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण अंचलों में हरित पर्यावरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्वास्थ्य और पोषण के स्तर को सुधारना है।

आंगन में लहलहाएगी ‘पोषण वाटिका’
इस कार्यक्रम के तहत स्थानीय किसानों को पपीता, सहजन (मुनगा), नींबू और आम के पौधे बांटे गए। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को अपने ही घर के आंगन या बाड़ी में ‘पोषण वाटिका’ विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। घर पर ही फलदार और औषधीय गुणों वाले पेड़ होने से परिवारों को आसानी से ताजे और पौष्टिक खाद्य पदार्थ मिल सकेंगे। इससे न केवल उनके रोजमर्रा के आहार में विविधता आएगी, बल्कि वे पोषण के मामले में आत्मनिर्भर भी बन सकेंगे।

इस योजना को धरातल पर पूरी तरह सफल बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), रायगढ़ का भी सहयोग लिया जा रहा है। केवीके के विशेषज्ञ किसानों को इन पौधों के सही रोपण, देखभाल और संवर्धन को लेकर तकनीकी मार्गदर्शन देंगे। इससे किसानों को वैज्ञानिक तरीके से कृषि पद्धतियां अपनाने और पौधों का सही रखरखाव करने में मदद मिलेगी, ताकि इन वाटिकाओं का लाभ उन्हें लंबे समय तक निरंतर मिलता रहे।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में एनटीपीसी लारा के परियोजना प्रमुख सुभाष ठाकुर और एजीएम (मानव संसाधन) जाकिर खान के साथ-साथ स्थानीय सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी ने पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के इस सामूहिक प्रयास को और भी सार्थक बना दिया।
एनटीपीसी लारा की यह पहल ग्रामीण समुदायों के समग्र विकास, पोषण जागरूकता और सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम है। सीएसआर के माध्यम से किए जा रहे ऐसे प्रयास स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने के साथ ही एक स्वस्थ एवं हरित भविष्य के निर्माण में अपना अहम योगदान देंगे।

