बिजली संकट पर जिला पंचायत सदस्य की चुप्पी से भड़के ग्रामीण, व्हाट्सएप ग्रुप्स में मचा बवाल, नहरपाली फिडर के हजारों उपभोक्ता परेशान

रायगढ़-खरसिया, 19 जुन। छत्तीसगढ़ में इस वक्त आसमान से आग बरस रही है, लेकिन खरसिया इलाके के कई गांवों में लोग सिर्फ मौसम की मार नहीं झेल रहे, बल्कि बिजली विभाग के ढुलमुल रवैये से भी खून के आंसू रोने को मजबूर हैं। किरोड़ीमलनगर सीएसपीडीसीएल के तहत आने वाले सिंघनपुर सबस्टेशन के नहरपाली फिडर ने इन दिनों हजारों ग्रामीणों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। नहरपाली, गिंडोला, दर्रामुड़ा, मांझीडीपा, बिंजकोट, भगोराडीह और झीटीपाली गांवों में बिजली की आंख-मिचौली का यह आलम है कि चौबीस घंटे में से चंद घंटे ही लोगों को ठीक से बिजली मिल पा रही है। उमस और इस तपती गर्मी में बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं।

विभाग की लापरवाही पर भड़का लोगों का आक्रोश
नहरपाली और आसपास के गांवों का दौरा करने पर जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली दिखती है। दोपहर के वक्त जब पारा आसमान छू रहा होता है, तब इन गांवों के घरों में पंखे और कूलर बंद पड़े रहते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली कब आएगी और कब जाएगी, इसका कोई तय वक्त नहीं है। रात को जब पूरा परिवार सोने की तैयारी करता है, ठीक उसी वक्त बत्ती गुल हो जाती है। इसके बाद लोग पूरी रात छतों पर या घरों के बाहर टहलकर गुजारने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात को लेकर है कि बिजली विभाग के अधिकारियों को बार-बार शिकायत करने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लाइन में क्या खराबी है, इसका जवाब देने के लिए भी सबस्टेशन पर कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं रहता।

नेताओं की चुप्पी से ग्रामीण नाराज, आंदोलन की तैयारी
इस पूरे संकट में बिजली विभाग के साथ-साथ इलाके के जनप्रतिनिधि भी ग्रामीणों के निशाने पर आ गए हैं। अमूमन हर छोटे-बड़े मुद्दे पर सामने आने वाले नेता और जनसेवक इस गंभीर समस्या पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। यह पूरा इलाका जिला पंचायत सदस्य के क्षेत्र में आता है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव बीत जाने के बाद नेताजी को जनता की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं रह गया है। अब ग्रामीणों का सब्र का बांध टूटने लगा है। लोगों का कहना है कि अगर जनप्रतिनिधियों को सच में जनता की फिक्र है, तो वे खुद आगे आएं और ग्रामीणों को साथ लेकर बिजली दफ्तर का घेराव करें। गांव के युवाओं का साफ कहना है कि वे इस लड़ाई में नेताओं का साथ देने को तैयार हैं, बशर्ते नेता अपनी एसी गाड़ियों से उतरकर सड़क पर आएं।

व्हाट्सएप ग्रुप्स में छिड़ी बहस, वोट के वादों पर उठे सवाल
नेताओं की इस निष्क्रियता और चुप्पी को लेकर अब लोकल व्हाट्सएप ग्रुप्स में भी जबरदस्त बहस छिड़ गई है। इन ग्रुप्स में वायरल हो रही चैटिंग और संदेशों से साफ है कि ग्रामीणों के भीतर कितना आक्रोश भरा है। सोशल मीडिया पर लोग सीधे तौर पर नेताओं को टैग करके सवाल पूछ रहे हैं। बातचीत के दौरान कुछ लोग इसे पिछले चुनावों में मिले वोट और वादों से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि सिर्फ वोट लेने के समय ही बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं और मुसीबत के समय जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है। फिलहाल स्थिति यह है कि अगर बिजली की यह समस्या जल्द दूर नहीं हुई, तो ग्रामीण किसी भी दिन बिजली दफ्तर के बाहर बड़ा चक्काजाम या उग्र प्रदर्शन कर सकते हैं।