कन्कसन नियम के तहत जड़ेजा की जगह गेंदबाजी कर पाए चहल ! जानें क्या है कन्कसन नियम व शर्तें ?

खेल डेस्क: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही टी20 सीरीज के पहले मैच में आईसीसी का कन्कसन नियम चर्चा में आ गया। दरअसल, जब बैटिंग के दौरान रविंद्र जड़ेजा चोटिल हुए तो उनकी जगह युजवेंद्र चहल को बतौर सब्सीट्यूट प्लेयर टीम में शामिल किया गया। युजवेंद्र चहल को कन्कसन नियम के तहत मैच में गेंदबाजी करने का भी मौका मिला। आईए जानते हैं क्या है कन्कसन नियम और इसका इतिहास।


खिलाड़ी की मौत के बाद बनी नियम की रूपरेखा

2014 में आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी फिलिप हॉग्स की प्रथम श्रेणी मैच के दौरान सिर में बॉल लगने के बाद मौत हो गई थी। इस घटना से क्रिकेट जगत को गहरा झटका लगा था और आईसीसी को इस तरह की घटना से बचने के लिए उपाय खोजना था। आईसीसी ने खिलाड़ी के सिर में चोट लगने की स्थित में उसकी जगह लेने वाले सब्सीट्यूट खिलाड़ी को उसकी तरह ही बैटिंग, बॉलिंग या फील्डिंग करने की अनुमति दी। इस नियम को कन्कसन सब्सीट्यूट का नाम दिया गया।


कन्कसन नियम का फायदा मिला यजुवेंद्र चहल को

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कन्कसन सब्सीट्यूट प्लेयर के तौर पर टीम में शामिल हुए युजवेंद्र चहल ने विपक्षी टीम के खिलाड़ियों को उबरने का मौका नहीं दिया। युजवेंद्र चहल को प्लेइंग इलेवेन में शामिल नहीं किया गया था, लेकिन रविंद्र जड़ेजा के सिर में बॉल लगने की वजह से कन्कसन नियम का फायदा भारतीय टीम को मिला और युजवेंद्र मैदान में उतरे और 3 विकेट चटकाए।

सबसे पहले कन्कसन सब्सीट्यूट ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी मार्नस लाबूशाने बने

कन्कसन नियम के तहत सबसे पहले सब्सीट्यूट खिलाड़ी आस्ट्रेलिया के मार्नस लाबूशाने थे। उन्हें स्टीव स्मिथ के सिर में चोट लगने के बाद इंग्लैंड के खिलाफ खेलने का मौका मिला था। नियम के तहत मैच के दौरान किसी खिलाड़ी के सिर में चोट लगने के बाद कन्कसन नियम लागू करने की मंजूरी देने का हक मैच रेफरी को होता है। भारत और आस्ट्रेलिया के मैच में भी रेफरी ने युजवेंद्र चहल को रविंद्र जड़ेजा की जगह लेने की अनुमति दी थी।