Sat. Dec 7th, 2019

विक्रम से संपर्क में इसरो को मिला नासा का साथ, साझा करेगा लैंडिंग की तस्वीरें

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से संपर्क को लेकर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का सहयोग मिल रहा है। नासा ने कहा है कि वह इसरो के साथ चंद्रमा के उस जगह की तस्वीरें साझा करेगा जहां सात सितंबर की अल सुबह विक्रम लैंडर ने हार्ड लैंडिंग की थी।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि, नासा चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की लैंडिग से पहले और बाद की तस्वीरों को इसरो के साथ साझा करेगा। इससे विक्रम को लेकर किए जा रहे अध्ययन में मदद मिलेगी।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी भी विक्रम लैंडर के साथ संचार को फिर से स्थापित करने का प्रयास कर रही है, जिसने 7 सितंबर से कोई संकेत प्रेषित नहीं किया है।

नासा का डीप स्पेस नेटवर्क (DSN) विक्रम लैंडर के साथ संचार को फिर से स्थापित करने की उम्मीद में रेडियो सिग्नल भेज रहा है। इसरो भी लैंडर के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए बंगलूरू के पास स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (IDSN) के एंटेना का उपयोग कर रहा है।

नासा ने चांद की सतह पर गतिहीन पड़े विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने के लिए उसे ‘हैलो’ का संदेश भेजा है। अपने डीप स्पेस ग्राउंड स्टेशन नेटवर्क के जरिए नासा के जेट प्रोपल्सन लैबोरेटरी (जेपीएल) ने लैंडर के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए विक्रम को एक रेडियो फ्रीक्वेंसी भेजी है। नासा के एक सूत्र ने इस बात की पुष्टि की।

विक्रम से संपर्क स्थापित करने की उम्मीदें दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही हैं। 14 पृथ्वी दिवस के बाद 20-21 सितंबर को जब चंद्रमा पर रात होगी तब विक्रम से दोबारा संपर्क स्थापित करने की सारी उम्मीदें खत्म हो जाएंगी।

एक अन्य अंतरिक्ष यात्री स्कॉट टिल्ले ने भी इस बात की पुष्टि की है कि नासा के कैलिफोर्निया स्थित डीएसएन स्टेशन ने लैंडर को रेडियो फ्रीक्वेंसी भेजी है। टिल्ले उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने 2005 में गुम हुए नासा के एक जासूसी उपग्रह का पता लगाया था।

लैंडर को सिग्नल भेजने पर चांद रेडियो रिफ्लेक्टर के तौर पर कार्य करता है और उस सिग्नल के एक छोटे से हिस्से को वापस धरती पर भेजता है जिसे 8,00,000 किलोमीटर की यात्रा के बाद डिटेक्ट किया जा सकता है।