मिलिये भारत के उन 5 एकात्म पराक्रमी लोगों से जिन्होंने अपने सम्बल पर भारत को वैश्विक पहचान दिलाई..!

इतने छोटे-बड़े जीवन मे किताबों और समाचार पत्रों के आधार पर हमने यह जाना(मैंने निजी रूप से)की हमने अपने देश मे राष्ट्र के रूप में प्रगति नही की देश के रूप में प्रगति नही की हमारी निजी प्रगति की देश की प्रगति बताई गई है।नमस्कार दोस्तों आज हम आपको उन 5 लोगों से रूबरू करवाएंगे जिन्होंने अपने एकात्म पराक्रम से देश का नाम रोशन किया।


1) एक मराठी के प्रोफेसर के लड़के ने 10वी में फेल होना स्वीकार किया लेकिन उस साढ़े पाँच फुट के लड़के ने तपती दोपहरी में बल्ला लेकर गेंद पर मारने की प्रैक्टिस की पूरा देश विश्व के साथ खड़ा हुआ कि हम सर सचिन तेंदुलकर को अपने पास रखते हैं।

2)रामेस्वरम के मल्लाह के बेटे ने बचपन मे तीर्थ यात्रियों को पहुँचाया वहाँ मंदिर तक और जितनी देर में उन्होंने परिक्रमा लगाई उतनी देर तक फ़िजिक्स की किताब पढ़ी हमने उसको बिखरी जुल्फों वाले कलाम को सलाम किया अपना राष्ट्रपति कह कर।

3) मध्यप्रदेश के एक अध्यापक के बेटे ने यूनाइटेड नेशन तक हिंदी को पहुँचाया और इस देश को राजधर्म सिखाया जिसे पंडित अटल बिहारी बाजपेयी कहकर हमने प्रणाम किया ।

4) गुजरात के एक सामान्य घर से चाय बेचने वाले ने स्वयं को एक बड़े राजनीतिक दल पर आकर खड़ा किया इस देश का प्रधानमंत्री बना और पूरी दुनिया मे गया जिसे नरेंद्र मोदी कहते हैं।

5) एक सामान्य इंजीनियर का लड़का आईआईटी पढ़ने वाला फ़टी हुई कमीज में जिसे जंगली कहा गया नक्सली कहा गया उसने 25 साल के अहंकार को दिल्ली में चुनौती दी और वहां का मुख्यमंत्री बना जिसे अरविंद केजरीवाल कहते हैं।