बड़ी खबर : जानिए कोविद 19 कोरोना महामारी के टेस्टिंग में कुत्तों से क्या काम लिया जा रहा है ? और कितना असरदार है?

दिल्ली 17 मई:- आपको जानकर हैरत होगी कि कोरोना वायरस को अब सूंघकर भी पता लगाया जा सकेगा | इसके लिए कुत्तों को प्रशिक्षित किया गया है | शोध के बाद उनका रिजल्ट शत प्रतिशत पाया गया है | दरअसल कुछ कुत्तों में सूंघकर पता लगाने की शक्ति मनुष्यों की तुलना में 10 हजार गुना होती है | इसी के आधार पर पुलिस डॉग सूंघकर किसी भी वस्तु का पता लगा लेते है | वैज्ञानिकों ने इसी गुण के चलते कुत्तों को कुछ खास किस्म के वायरस का पता लगाने के लिए ट्रेनिंग दी है | ब्रिटेन में कोरोना वायरस सूंघकर पता लगाने वाले कुत्तों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है | यहां अब मरीजों के कोरोना पॉजिटिव लक्षणों की पहचान के लिए एक ट्रायल शुरू किया जा रहा है | इसमें सरकार करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की धनराशि खर्च करेगी | डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 के लक्षणों की पहचान के लिए कुत्तों पर किए जाने वाले इस ट्रायल में कामयाबी मिली तो शोध की दुनिया में इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जाएगा |

वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोना की पहचान करने में ये कुत्ते टेस्टिंग किट से भी कहीं ज्यादा तेज हो सकते हैं | लैब में कोरोना की एक टेस्टिंग में तकरीबन 5 से 6 घंटे का समय लगता है | बाकी प्रोसेस पूरे होने के बाद कई घंटों में इसकी रिपोर्ट मिलती है माना जाता है कि कुत्तों की नाक में इंसान की तुलना 10 हजार गुना ज्यादा तेज सूंघने की शक्ति होती है | लैब्राडोर्स और कूकर स्पैनियल्स जैसी कुत्तों की विशेष प्रजातियां पहले भी कैंसर, मलेरिया और पार्किंसन जैसी बीमारियों का इंसान के शरीर में पता लगाने का काम कर चुकी हैं |  

डॉग टेस्टिंग ट्रायल की कमान लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन , चैरिटी मेडिकल डिटेक्शन डॉग्स और डरहम यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के हाथों में होगी | एलएसएचटीएम के प्रोफेसर जेम्स लोगन को इस ट्रायल से काफी ज्यादा उम्मीदें हैं | शोधकर्ताओं ने रिपोर्ट में दावा किया है कि यदि ट्रायल में सफलता मिली तो कुत्ते एक घंटे में तकरीबन 250 लोगों में वायरस डिटेक्शन का काम कर पाएंगे | जिन रोगियों के शरीर में कोरोना के लक्षण नजर नहीं आते हैं, कुत्ते वहां भी अपना चमत्कार दिखा सकते हैं |

श्वास क्रियाओं से जुड़े कुछ रोग अपने दुर्गन्ध बदलने के लिए भी जाने जाते हैं, इसलिए इस ट्रायल में कुत्तों के सामने बड़ी चुनौती भी होगी | हालांकि कुत्ते की नाक से बच पाना वायरस के लिए भी आसान नहीं होगा | शोध में बताया गया कि गंध को पहचानने में कुत्तों की नाक इतनी ज्यादा तेज होती है कि अगर आप ओलंपिक साइज स्विमिंग पूल में एक चम्मच चीनी भी घोल दें तो उसका भी पता ये कुत्ते बड़ी आसानी से लगा सकते हैं | डरहम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टीव लिंडसे ने बताया था कि कोरोना वायरस की बीमारी को फिर से उभरने से रोकने में कुत्ते काफी कारगर साबित हो सकते हैं | कुत्तों को डिटेक्शन के लिए उनकी तैनाती एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों पर की जाती है | कुत्ते ड्रग्स और विस्फोटकों को सूंघकर पता लगाने की क्षमता रखते हैं | जानकारी के मुताबिक जिन कुत्तों ने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है | वे संक्रमित मरीजों और वायरस की पहचान करने में कारगर साबित हुए है | उनका रिजल्ट 100 फीसदी है | डरहम विश्वविधालय के प्रोफेसर स्टीव लिंडसे के मुताबिक जल्द ही ब्रिटेन ऐसे प्रशिक्षित कुत्तों उन देशों में भेज सकता है जहाँ संक्रमण तेजी से फ़ैल रहा है |