एसकेएस प्लांट के तानाशाही व मनमानी रवैये को लेकर ग्रामवासियों ने दिया धरना.. प्लांट प्रबंधन के सामने सिस्टम ने टेके घुटने ? पढ़े खबर..!

खरसिया। खरसिया ब्लॉक के दर्रामुड़ा-बिंजकोट स्थित एसकेएस पावर प्लांट की मनमानियों एवं अड़ियल रवैये को लेकर कर्मचारियों सहित ग्रामवासियों ने अनिश्चितकालीन धरना रविवार से प्रारंभ कर दिया है।

आपको बता दें कि हमारे वेब पोर्टल में लगातार प्लांट के द्वारा किये जा रहे गलत कार्यो को उजागर किया है इसके अलावा ग्रामीणों ने कई बार प्लांट के मनमानी रवैये के जिला प्रशासन को लिखित में सूचना दी है और आवाज भी उठाया है। एसकेएस प्लांट के द्वारा पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की छत्रछाया में क्षेत्र में बेतहाशा प्रदूषण फैलाया जा रहा है जिसकी कोई सीमा नहीं है। वहीं कर्मचारियों एवं ग्रामवासियों के हितों की अनदेखी करते हुए पानी सप्लाई एवं एंबुलेंस जैसी अति आवश्यक सेवाओं को भी बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं प्लांट का एस डाइक इस स्थिति में पहुंच चुका है कि कभी भी धराशाई हो सकता है। ऐसे में क्षेत्रवासियों को ऊर्जा नगरी जैसी बड़ी अनहोनी भुगतने का डर बना हुआ है।

23 फरवरी को ग्राम सरपंच तथा जिला पंचायत सदस्य एवं सुधि ग्रामवासियों द्वारा जिलाधीश भीमसिंह को ज्ञापन देकर इन मनमानियों पर अंकुश लगाने का निवेदन भी किया गया था। वहीं इत्तला किया गया था कि सात दिवस पश्चात यदि मांगों का निराकरण नहीं होगा तो ग्रामवासियों को धरना प्रदर्शन करने की मजबूरी भी आन पड़ेगी।

▪️ प्लांट प्रबंधन ने अपनाया अड़ियल रवैया इनके सामने किसी भी जनप्रतिनिधि व ग्रामीणों की नहीं है कोई सुनवाई

एसकेएस पावर के प्रदूषण से प्रभावित ग्रामवासियों द्वारा 23 फरवरी को जिलाधीश को दिए ज्ञापन की प्रति प्लांट प्रबंधन को भी दी गई थी। वहीं प्रबंधन ने अव्यवस्थाओं के समाधान के लिए तीन-चार दिन का अतिरिक्त वक्त भी मांगा था परंतु प्लांट प्रबंधन ने अड़ियल रवैया अपनाते हुए जनहित की मांगों को दरकिनार कर दिया। बैठकों का दौर तो जरूर हुआ, परंतु प्रतिनिधि मंडल एवं प्लांट प्रबंधन के बीच बात नहीं बनी, कहना होगा कि प्रबंधन अपनी मनमानियों से बाज ना आते हुए पूर्व की भांति ही ग्रामवासियों को गर्त में धकेलने की कसम खा चुका है। ऐसे में प्रभावित ग्रामवासियों को अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था।

एक सवाल :- साहब क्या आप जिलाधीश से बड़े हैं?

उल्लेखनीय होगा कि धरने पर बैठे ग्रामवासियों पर अब एसकेएस पावर प्रबंधन द्वारा प्रदर्शन समाप्त करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है जबकि स्वयं ग्राम सरपंच एवं जनपद सदस्य से हस्ताक्षरित ज्ञापन जिलाधीश रायगढ़, एसडीएम खरसिया तथा प्लांट प्रबंधन को 23 फरवरी को ही दे दिया गया था।

प्रदूषण की मार झेल रहे ग्रामीणों भोले-भाले ग्रामीणों पर बिना सूचना के धरना प्रदर्शन करने की बात कह कर धरना समाप्त करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है अब देखना ये है की क्या प्लांट प्रबंधन के खिलाप जिला प्रशासन कार्यवाही करती है या प्लांट प्रबंधन हमेशा की तरह ग्रामीणों को दबाने में कामयाब हो जाएगा ?