रायगढ़ में अद्भुत नजाराः सूर्य के चारों ओर नजर आया सतरंगी घेरा.. वीडियो व तस्वीरों में देखें इस अद्भुत नजारे को

रायगढ़। रायगढ़ के आसमान में आज सूर्य के चारों ओर बना रंगीन गोला (रेनबो) बना हुआ है जो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन रहा है। शहर में अद्भुत रंगीन सर्कल को सूर्य के चारों ओर फैला को देखकर लोग तरह-तरह के कयास लगाने लगे हैं। आज सोमवार को मौसम खुला हुआ था। चिलचिलाती हुई धूप खिली हुई थी लेकिन 11:30 बजे के करीब आसमान में तेज रौशनी से चमक रहे सूर्य के चारों ओर इंद्रधनुषी कलर के समान जैसे गोलाकार सर्कल बना हुआ दिखाई दिया। गोले के भीतर काले बादल मौजूद थे, जबकि बीच में सूर्य अद्भुत दिखाई दे रहा है। आकाश एक आश्चर्यजनक चीज है, लगातार बदलते और विविध। लेकिन हम कितनी बार आसमान की ओर अपना ध्यान लगाते हैं? आमतौर पर लोग ध्यान नहीं देते हैं और आकाश में जो कुछ भी हो रहा है उसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। और केवल जब इसमें अजीब घटनाएं होती हैं, तो क्या इसका ध्यान बढ़ता है और यह कहना शुरू कर देता है कि आकाश लोगों को संकेत देता है।

सूर्य के चारों ओर इंद्रधनुष का क्या अर्थ है?

जो लोग इस दुर्लभ घटना को देखने के लिए भाग्यशाली थे, उन्हें सभी सबसे अच्छी – भलाई, समृद्धि, सौभाग्य और प्यार की उम्मीद करनी चाहिए। यदि पहले यह जीवन सबसे आसान अवधि नहीं थी, तो यह निश्चित रूप से समाप्त हो जाएगा और सब कुछ सबसे अच्छा संभव होगा।

सूर्य वलय: सूर्य देव ने ‘22 डिग्री सर्कुलर हलो’ के रूप में दिए दर्शन

सूर्य के चारों तरफ घेरा जैसा नजारा दिखा। इसे सूर्य का वलय बताया जा रहा है। जानकारों ने बताया कि आसमान में जब बादल डेरा बनाते हैं और ये अगर अंतरिक्ष की ऊपरी परत पर चले जाते हैं तो सूर्य की रोशनी इससे टकराकर लौटती है। इस रिफ्लेक्शन से सूर्य के चारों तरफ वलय का आभास होता है। अगर इस प्रकार की स्थिति सुबह या शाम में बने तो हमें इंद्रधनुष नजर आता है। सुबह के समय में आसमान की ऊपरी परत में बादल जमने पर पूर्व की दिशा में और शाम के समय में पश्चिम की दिशा में इंद्रधनुष बनता दिखता है। सूर्य के चारों तरफ वलय की स्थिति सुबह 10 बजे के बाद और शाम में तीन बजे तक तेज धूप रहने की स्थिति में दिखती है।

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ऐसा तब होता है जब सूर्य की किरणें अपवर्तित होती हैं
सूर्य के चारों ओर लाल और नीला वलय दिखा। खगोल विज्ञान में इसे ‘22 डिग्री सर्कुलर हलो’ कहते हैं। ऐसा तब होता है जब सूर्य या चंद्रमा की किरणें बादलों में मौजूद षट्कोणीय बर्फ क्रिस्टलों से अपवर्तित हो जाती हैं। इस घटना को सूर्य या कुछ मौकों पर चंद्रमा का ‘22 डिग्री सर्कुलर हलो’ कहा जाता है। हेलो का जन्म तब होता है जब प्रकाश बर्फ के क्रिस्टल द्वारा अपवर्तित होता है जो सिरस के बादलों या वायुमंडल की निचली परतों में उत्पन्न होते हैं। ये जमे हुए कण हवा में आंदोलन के आकार और विधि में भिन्न होते हैं। वे चढ़ सकते हैं, धीरे-धीरे उतर सकते हैं या घूम सकते हैं। ऑप्टिकल घटना का प्रकार तत्वों और उनके स्थान के कॉन्फ़िगरेशन पर निर्भर करता है। प्रकाश के साथ खेलने वाला भ्रम इंद्रधनुष के समान है, लेकिन इसमें पानी की बूंदों के बजाय, बर्फ के क्रिस्टल रिफ्लेक्टर के रूप में काम करते हैं। हॉलैंड के एस्ट्रोनॉमर मार्सेल मिनर्ट ने इस श्रेणी की घटनाओं के अध्ययन में एक विशेष योगदान दिया। उन्होंने प्रकाश और वातावरण, प्रभामंडल प्रणालीकरण की बातचीत के अध्ययन के लिए बहुत समय समर्पित किया।