डर ही वायरस है, विश्वास ही वैक्सीन है : दिलीप पाण्डेय

रायगढ़। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व पुसौर के सक्रिय समाजसेवी दिलीप पाण्डेय ने अपने निजी विचार साझा करते हुए बताया कि कोरोना के दूसरी लहर ने प्रदेश और देश के सिस्टम की पोल खोल दी है। इस भयंकर महामारी के दूसरे लहर की मारक क्षमता का अनुमान लगाने में हमारा सारा सिस्टम असफल रहा है फिर चाहे वो केंद्र हो या राज्य। प्रधानमंत्री जी की इच्छा को सच साबित करने के लिए समर्पित देश के नीति निर्धारक तथा उनके सुयोग्य सलाहकार उनके आत्ममुग्धता को तोड़ने का साहस नहीं कर पाए, यही बात राज्य के मुखिया के सन्दर्भ में भी कही जा सकती है। प्रधानमंत्री जी द्वारा जब भारत के कोविड मैनेजमेंट को विश्व के विकसित देशों के लिए अनुकरणीय बताया जा रहा था तब उनके सामने दूसरी लहर का जिक्र करने की गुस्ताखी उनके अधीनस्थों से ना हुई। इसी तरह प्रदेश के मुख्यमंत्री जी के सलाहकार उन्हें भी दूसरी लहर के लिए आवश्यक तैयारी करने की सलाह देने का साहस नहीं दिखा सके।

चुनाव में विशाल रैलियों और कुंभ का विशाल आयोजन भयंकर भूल साबित हो रहा है। कोविड – 19 से मुकाबला करने के लिए पिछले 1 साल में सत्ता के केंद्रधीशों के द्वारा अस्पताल, ऑक्सीजन, दवाई और वैक्सीन पर जितना ध्यान देना चाहिए था उतना नहीं दिया गया। भूलें और मूर्खताएँ भी यदि विशाल हो तो जनता चकीत व भ्रमित तो हो ही जाती है इसके लिए वर्तमान सरकार और उनके मुखिया की गलत और गैरजिम्मेदार नीतियों का जिक्र होने से बचा नहीं जा सकता। देश के लोगों की इस महामारी की रक्षा नहीं कर पाने की जिम्मेदारी से सत्ताधीश और उनके मुखिया बच नहीं सकते। प्रधानमंत्री जी मुख्यमंत्री जी ऑक्सीजन, दवा व बैड की कमी से जूझने वाले परिजनों की तरह आप भी बेबस नहीं हैं। आप देश के प्रधानमंत्री हैं और आप राज्य के मुखिया हैं। आप असीमित शक्तियों के मालिक हैं, आपके पास सूचना के सर्वश्रेष्ठ स्रोत हैं। आप कांटेक्ट ट्रैस नहीं कर पा रहे हैं आप बैड उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। आपके पास मैन पावर की कमी है तो हमें मान लेना चाहिए कि कम्युनिटी स्प्रेड हो गया है। पर सरकार यह कभी नहीं मानेगी।

मुझे याद है 11 इम्पायर ग्रुप एक साल पहले बनी थी जिन्हें इस महामारी के रोकथाम के लिए कार्य करना था। सरकार को सुझाव देना था, वेंटिलेटर निर्माण एवं उसके सप्लाई को देखना था, जमीन पर कदम उठाने के लिए सलाह देना और उसकी निगरानी करना, आईसीयू बैड को लेकर की योजना बनाना, सलाह देना तथा जमीनी कार्यों के आंकलन की जिम्मेदारी, कंटेंटमेंट जोन की जिम्मेदारी के निवारण के लिए उपाय करने थे। दूसरी लहर के लिए इम्पायर ग्रुप कितने जिम्मेदार हैं? इस ग्रुप ने इससे आंखें बंद कर ली, रोकथाम के लिए इस ग्रुप ने क्या किया इसका अभी तक कोई पता नहीं है। इसे बताया जाना चाहिए। इतना बड़ा तंत्र आपके पास नहीं जो कांटेक्ट ट्रेसिंग कर सके, आपको मेन पावर बढ़ाने के सरकारी हस्तक्षेप को रोकना चाहिए।

कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने जिस तरह जनता का जीवन बेहाल कर रखा है उससे मुझे लगता है कि इससे निपटने की तैयारी जनता को, सिस्टम को, सरकार को मिलकर सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए और यदि युद्ध स्तर पर इसकी तैयारी कर पाने में हम असफल रहे तो भगवान ही मालिक है। जनता का हाल में लॉकडाउन में घर में रहते हुए व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के माध्यम से ईडियट बॉक्स के माध्यम से सकारात्मक सोच की जो सलाह दी जा रही है उतने से ही जन सामान्य के मन में सकारात्मक सोच पैदा हो नहीं सकता। वैक्सिनेशन को बढ़ाया जाना चाहिए। जनता को जागरूक किया जाना चाहिए।

कोविड-19 के गाइडलाइन का जितना प्रचार – प्रसार पहली लहर में किया गया उसका आधा भी दूसरे लहर में नहीं किया जा रहा है और मुझे तो लगता है सारे तंत्र का हाथ पांव फूल चुका है। हमारे कोरोना वारियर्स रोज-रोज के पीड़ित परिजनों के दबाव में व पैनिकपन से जूझ रहें हैं। इस मानसिक दबाव से विचलित हो रहे हैं। उनके पास वर्क लोड ज्यादा है। जनता डेली यूज़ के सामानों पर परेशान हो रही है पर एक बात अच्छी है पुलिस प्रशासन पहली लहर के समान कढ़ाई नहीं बरत रही है और समझाईश दे रही है। जनता भी धीरे-धीरे जागरूक हो रही है और इस महामारी से निपटने में अपना योगदान कर रही है।