रायगढ़/ कार्मेल स्कूल की दादागिरी फिर हुई शुरू ! अपने चहेते किताब दुकानदारों से किताबों का पूरा सेट खरीदने स्कूल प्रबंधन कर रहा बाध्य ! किताब दुकानदारों व कार्मेल स्कूल प्रबंधन की मिलीभगत से परेशान हो रहे अभिभावक ! ग्रीनमैन रमेश अग्रवाल ने डीएम भीमसिंह से शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच हेतू की मांग.. पढ़े खबर..!

रायगढ़। लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद हैं, इसके बाद भी निजी स्कूलों में किताबों का व्यवसाय शुरू हो गया। स्कूल संचालक अभिभावकों के मोबाइल पर मैसेज भेज उन पर किताब खरीदने का दबाव बना रहे हैं। किताब खरीदना तो ठीक है, अभिभावकों की समस्या यह है कि हर निजी स्कूल संचालक ने अपनी किताब दुकान फिक्स कर रखी है। उस विद्यालय की किताबें सिर्फ एक दुकान पर ही मिलती हैं। फिक्स दुकान से अभिभावक महंगी किताब खरीद कर लुटने को मजबूर हैं। कोरोना वायरस एवं लॉकडाउन में आर्थिक तंगी से गुजर रहे परिवारों को अब निजी स्कूलों द्वारा लुटा जा रहा है।शहर के हर बड़े प्राइवेट स्कूल अलग- अलग लेखकों की पुस्तकें सिर्फ इसलिए चलाते हैं कि उन्हें विक्रेता से मोटा कमीशन मिलता रहे।

बच्चों की पढ़ाई नुकसान ना हो इस वजह से आर्थिक तंगी से भुगत रहे पालक भी स्कूल के विरुद्ध शिकायत करने से घबराते हैं

आर्थिक तंगी से गुजर रहे अभिभावक स्कूल संचालकों की मिलीभगत के कारण किताबों का महंगा सेट खरीदने को मजबूर हैं। अभिभावक इस परेशानी की शिकायत करने से बच रहे हैं। निजी स्कूल में पढ़ने वाले बधो के एक अभिभावक ने कहा कि शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती। उल्टा, शिकायत करने के बाद स्कूल बधाों पर दबाव बनाते हैं। इसलिए किताबों का महंगा सेट खरीदने के बाद भी अभिभावक मौन हैं।

“सोंचने पर ही बड़ा विचित्र लगता है कि किसी स्कूल विशेष की किताबें किसी एक विशेष पुस्तक दुकान पर ही मिलेगी ! ऐसा होता है तो दुकानदार मनमानी करता है और स्कूल प्रबंधन पर उँगलियाँ उठना स्वभाविक है।”

कार्मेल स्कूल प्रबंधन के खिलाप ग्रीनमैन रमेश अग्रवाल ने कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है

ऐसे ही एक मामले की शिकायत जन चेतना सदस्य और ग्रीनमैन रमेश अग्रवाल ने रायगढ़ कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी से की है। अपनी शिकायत में रमेश अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि उनकी पौत्री कार्मेल स्कूल की पहली क्लास की छात्रा है और विजय बुक डिपो द्वारा पूरा सेट खरीदने के लिये बाध्य किया जा रहा है जबकि उन्हें कुछ ही किताबों की आवश्यकता है। स्कूल प्रबंधन से शिकायत करने पर उन्होंने भी टका सा जवाब दे दिया कि आप तो सक्षम हैं, सभी किताबें ले लें या फिर 25 तारीख के बाद खरीद लेनाशायद उन्हें मालूम था कि दुकानदार 25 से पहले कुछ किताबें नहीं देगा। पूरे घटनाक्रम को देखते हुये रमेश अग्रवाल ने इसे नेक्सस बताते हुये उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

एक बात तो तय है की आम पालकगण स्कूल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत करने से डरते हैं लेकिन और उनका यही डर का फायदा निजी स्कूल संचालकों उनके टाईअप रहे दुकानदार उठाते हैं इसलिए सभी 5 लोगों को चाहिए कि किस प्रकार से हो रहे मामलों की शिकायत कर उच्चाधिकारियों से कार्यवाही की मांग करनी चाहिए।

श्री रमेश अग्रवाल