शहीद दीपक भारद्वाज की धर्मपत्नी को डिप्टी कलेक्टर और शहीदों की राशि 80 लाख को 1 करोड़ करें- शैलेश मनहर

शहीदों को मुवावजों में ना तौले, अगर देना ही है तो सम्मान दीजिए।

रायगढ़ 08 अप्रैल 2021:- छत्तीसगढ़ के बीजापुर की हालिया नक्सली हमले ने एक बार फिर कई सवालों को हवा दे दी है कि, क्या हमारी फौज के प्रशिक्षण, सूचना, सुरक्षा, नीति, तंत्र से नक्सलियों के तंत्र ज्यादा मजबूत हैं ?? या फिर ये हमारी अधूरी रणनीति का परिणाम है जिसके वजह से हमारे जाँबाज शेरों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है ?? आखिर क्या कारण है जिसके कारण बार-बार वही घटना घटते आ रहा है ?? जो हमारी इंटेलिजेंस ब्यूरो को वहाँ की हलचल का तनिक भी पूर्वानुमान ज्ञान नहीं हो पाता है ?? कहाँ फैल हो रहे हैं हम ?? इन जैसे कई सवाल मन में कौंधते हैं।

बहरहाल आगे बात करते हैं। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुए नक्सली मुड़भेड़ में एक बार फिर हमारे देश-प्रदेश के दो दर्जन जवानों ने अपनी जान माओवादियों की घिनौनी साजिश के कारण गंवाए हैं। कितने लोगों ने अपने बुढ़ापे की लाठी को खो दिया, कितनों ने भाई, यार, पत्नियों ने जीवन भर के अपने साथी को खो दिया। मासूम बच्चों ने पापा खो दिया। उनके लिए अब पापा केवल शब्द रह गए हैं। आखिर कब तक इस तरह से हमारे जवान चक्रव्यूह के शिकार होते रहेंगे ?

घटना ताजा रहता है तो सभी लोग शोक सभा का आयोजन करते हैं।मोमबत्ती जलाते हैं। दूसरे दिन भूल जाते हैं लेकिन जिनके घर का चिराग बुझ गया उनके ऊपर क्या बीतती है कोई जानने की जहमत नहीं उठाते। शहीदों को मुवावजों में ना तौले। अगर आपको देना ही है तो उनके परिजनों को सम्मान दीजिए। शहीदों के नामों से नवीनतम जितने भी सरकारी स्कूलों, अस्पतालों, भवनों का नामकरण करवाइए। उनके परिजनों को योग्यता अनुसार सम्माननीय पदों पर सरकारी नौकरी में ले ताकि उनकी आर्थिक, सामाजिक सम्मान बना रहे। और समय-समय पर क्षेत्र के मंत्री विधायक जनप्रतिनिधि उनका हालचाल जानते रहे कि कहीं उनको कुछ समस्या तो नहीं।

प्रदेश सतनामी समाज छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिलाध्यक्ष शैलेश मनहर ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी आदेश को नाकाफ़ी बताया है, और माँग की है कि शहीद दीपक भारद्वाज की पत्नी को डिप्टी कलेक्टर का पद देकर उनकी शहादत का सम्मान करें। जनभावना भी इसी ओर इंगित करती है। इसी के साथ सभी शहीदों के परिजनों को भी उच्च सम्माननीय पदों पर नियुक्त किया जाए। और आपके द्वारा जो 80 लाख देने की बात कही गई है वो भी उनके जान, सम्मान की कीमत में कुछ भी नहीं है। इसको भी 1 करोड़ करें, ताकि उनके परिजनों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके। क्योंकि इसके उलट जब राजनीति की बात आती है तो सब नियम कानून धरे के धरे रह जाते हैं और मनचाहे ओहदे दे दिए जाते हैं, लेकिन जब बात हमारे जाँबाज जवानों की आती है तो बात अलग हो जाती है। यहाँ भी वही नियम लागू करने निर्णय ले।