नेताओं के चुनावी वादों को तंज कसते हुए “अप्रैल फूल” पर कविता

रायगढ़ 01 अप्रेल2021:- आज 1अप्रैल है। आज अधिकतर लोगों को कहते या बनाते हुए सुन लेंगे या देख लेंगे। अप्रैल फूल। आज ठगने का दिन है। लेकिन इसी दिन को ध्यान में रखकर हमारे नेताओं ने किस प्रकार से हमारे देश के भोलेभाले नागरिकों को अपने चुनावी घोषणाओं के जाल से फ़ांस लिया है उसी को रायगढ़ के उभरते हुए कवि जयलाल कलेत ने अपनी लेखनी से हम सबको समर्पित किया है। तो चलिए पढ़ते हैं उनकी कविता:-

* अप्रैल फूल*

नेताओं के किए चुनावी वादे,
तुम्हें न जाने क्यों बर्फ सा कुल लगते है।
कैसे यकीन करें इनकी हर बातें ,
इनकी बातें हमें अप्रेल फूल सा लगते है।

चुनाव में किए गए हर वादे,
तुम्हें न जाने क्यों ब्यूटीफुल सा लगते है।
न नजर आएंगे वादे करने वाले,
इनकी बातें हमें अप्रेल फूल सा लगते है।

हम सरेआम यूं ही ठगे गये है यारों,
उन पर यकीन करना फिजुल सा लगते है।
चल दिए जो फर्राटेदार झूठ बोलकर,
इनकी बातें हमें अप्रेल फूल सा लगते है।

हमने जो आश लगाकर आज भी बैठे हैं,
अब तो सब हमारी भूल सा लगता है।
उनकी हर बातें निकल गया जुमला,
इनकी बातें हमें अप्रेल फूल सा लगते है।

दे दिए पांच साल के लिए कुर्सी हमने,
अब उनके लिए हम पांव का धूल सा लगते है।
भूले हर वादे सियासत वाले,
इनकी बातें हमें अप्रेल फूल सा लगते है।

जयलाल कलेत