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मानहानि मामले में मंत्री अजय चंद्राकर ने कोर्ट में दर्ज कराया बयान, अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी

रायपुर. पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अजय चन्द्राकर ने मानहानि के मामले में आज जिला कोर्ट पहुंचकर बयान दर्ज कराया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी, दरअसल मंत्री चंद्राकर ने दो अप्रैल को सामाजिक कार्यकर्ता मंजीत कौर बल और कृष्ण कुमार साहू के विरूद्ध मानहानि का प्रकरण दर्ज कराया था, उन्होंने कोर्ट से अपील की थी कि इस मामले में जल्द से जल्द सुनवाई की जाए|

बयान दर्ज कराने के बाद मंत्री चंद्राकर ने कहा कि बदनाम करने की नियत से मुझ पर इस तरह के आरोप लगाते रहते है। हमेशा सत्य की जीत होती है। इसलिए मेरे खिलाफ लगे आरोप का हाईकोर्ट से, सुप्रीम कोर्ट से सभी अदालतों में इनके प्रकरण खारिज हुए है। उन्होंने ये भी कहा कि मुझे न्यायिक प्रकिया में पूर्ण आस्था और विश्वास है। मुझे जीत अवश्य मिलेगी।

माफी मांगने के बाद ही विचार करूंगा

इस दौरान मीडिया ने जब यह पूछा कि क्या माफी मांगने के बाद केस वापस लेंगे । इस पर चंद्राकर ने कहा कि माफी मांगने के बाद ही विचार करूंगा। मंत्री के वकील राजकुमार शुक्ला ने इस संबंध में बताया कि प्रारंभिक बयान दर्ज कर लिए गए हैं। प्रकरण की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।

मंत्री अजय चंद्राकर ने याचिका दायर किए जाने के दौरान कहा था कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोनों याचिकाकर्ता मंजीत और कृष्ण ने अपनी याचिका वापस ले लेने के बावजूद उनके खिलाफ लगातार अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कई आरोप लगा रहे हैं, तथा बार-बार इनके द्वारा संयुक्तरूप से सार्वजनिक बयानबाजी कर प्रतिष्ठा धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है, इस कारण उन्होंने दोनों पर मानहानि का मुकदमा दायर करवाया है, अजय चन्द्राकर ने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रकिया में पूर्ण आस्था और विश्वास है|

क्या है आय से अधिक संपत्ति का मामला?

याचिकाकर्ता मंजीत कौर और कृष्ण कुमार साहू ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में अजय चंद्राकर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को निचली अदालत में अपील करने का निर्देश दिया था। इससे पहले निचली अदालत ने मंत्री जी की चल और अचल संपत्ति की जांच की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था। इस पर अजय चंद्राकर ने मामले को रोकने के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। यहां वे तकनीकी आधार पर याचिका को निरस्त कराने में कामयाब रहे थे। आर्थिक अपराध व्यूरो द्वारा की गई जांच में मंत्री के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला नही बना जिसे माननीय जिला न्यायालय धमतरी एवं माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय द्वारा खारीज कर दिया गया । अगस्त 2017 को हाई कोर्ट से याचिका निरस्त होने के बाद 22 नवंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अपील की गई थी,  न्यायहित में नहीं होने के कारण सभी माननीय न्यायलयों में इनके प्रकरण खारीज हुए है।

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