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29 सीटों का ट्रेंड / 14 सीटें ऐसी जहां भाजपा 15 साल से नहीं हारी, तीन कांग्रेस का गढ़, 12 पर बारी-बारी

लोकसभा चुनाव में दिल्ली की हवा रहती है प्रदेश पर हावी इस बार भी प्रदेश में राष्ट्रीय मुद्दों की गूंज स्थानीय मुद्दों पर हावी

भोपाल (शैलेंद्र चौहान). प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों का सियासी ट्रेंड बीते 30 साल से लगभग एक जैसा ही रहा है। उसका मुख्य कारण है- दिल्ली की हवा का प्रदेश के वोटर के दिमाग पर हावी होना। सिर्फ 2009 में ही ऐसा हुआ, जब कांग्रेस को 29 में से 12 सीटें मिली थीं जो कि 2004 के परिणामों से 8 सीटें ज्यादा थीं और भाजपा की सीटें 2004 की तुलना में 25 से घटकर 16 रह गई थीं। तब भी दिल्ली में यूपीए की सरकार थी।

प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 14 ऐसी हैं, जहां भाजपा बीते डेढ़ दशक से नहीं हारी, जबकि तीन सीटें लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ हैं। 12 सीटें ऐसी जहां भाजपा-कांग्रेस बारी-बारी से जीतती रही हैं। इस बार भी चुनाव में दिल्ली के मुद्दों की गूंज है। मोदी सरकार की किसान को सीधे पैसा पहुंचाने की स्कीम, आयुष्मान योजना और एयर स्ट्राइक ने कांग्रेस के कर्जमाफी के मुद्दे को कमजोर किया हुआ है।

मुद्दा ट्रेंड –

  • मालवा-निमाड़ : कुल सीट : 07, इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम-झाबुआ, मंदसौर, खंडवा, खरगोन
  • वोटर का रुख : मालवा-निमाड़ में बेरोजगारी, खेती-किसानी और हिन्दुत्व बड़ा मुद्दा है। इंदौर सीट 30 साल से भाजपा ने नहीं हारी है। रतलाम-झाबुआ कांग्रेस के गढ़।
  • महाकौशल : कुल सीट : 06, जबलपुर, छिंदवा़ड़ा, मंडला, बैतूल, शहडोल, बालाघाट
  • वोटर का रुख : छिंदवाड़ा कमलनाथ का गढ़ है। जबलपुर और बैतूल में 1996 के बाद से भाजपा नहीं हारी है। बालाघाट और मंडला लगातार कब्जे में है। खेती-किसानी बड़ा मुद्दा।
  • ग्वालियर-चंबल : कुल सीट : 04, ग्वालियर, गुना, भिंड, मुरैना
  • वोटर का रुख : सिंधिया राजघराने के पास ग्वालियर और गुना सीट। मुरैना ब्राह्मण-ठाकुर प्रत्याशी के चेहरे से भाजपा जीत रही। भिंड में दो दशक से कब्जा। यहां मुद्दे मिले-जुले।
  • विंध्य : कुल सीट : 03, सीधी, सतना, रीवा
  • वोटर का रुख : विंध्य में बसपा और दूसरी पार्टी का असर होता है। ब्राह्मण-ठाकुर वोट बैंक वाले इलाके में जातियों के सहारे भाजपा-कांग्रेस जीतते रहे हैं। बसपा-सपा ने भी वोटरों का रुख बदलकर जीत हासिल की है।
  • बुंदेलखंड : कुल सीट : 04, खजुराहो, टीकमगढ़, सागर, दमोह
  • वोटर का रुख : इन सभी सीट पर भाजपा डेढ़ दशक से कब्जा किए हुए है। पार्टी प्रत्याशियों के चेहरे बदलती रही है, लेकिन जातिगत वोट बैंक से जीतती रहती है।
  • मध्यभारत : कुल सीट: 05, भोपाल, होशंगाबाद, देवास, राजगढ़, विदिशा
  • वोटर का रुख : भाजपा का गढ़ है। भोपाल और विदिशा दो दशक से भाजपा के कब्जे वाली रही है। होशंगाबाद, राजगढ़ और देवास एक-एक बार कांग्रेस जीती है।

किस चुनाव में कैसा वोट ट्रेंड

  • 2014 : भाजपा ने पहली बार 54.8 फीसदी वोट पाकर 29 में से 27 सीटों पर कब्जा जमाया। कांग्रेस को केवल 35.4 फीसदी वोट मिले। वह केवल दो सीट पर सिमटकर रह गई।  
  • तीन मुद्दे :  मोदी लहर, हिन्दुत्व, खेती-किसानी।
  • 2009 : कांग्रेस को 6 फीसदी ज्यादा यानी 40.1% वोट मिले। 12 सीट पर कब्जा जमाया। भाजपा 43.4% वोट पाकर 16 सीट पर सिमटी । बसपा को 5.9 प्रतिशत वोट मिल गए। 
  • तीन मुद्दे : भाजपा के बड़े चेहरों से नाराजगी, स्थिर सरकार न होना।
  • 2004 : भाजपा को 48.1% वोट, 25 सीटें मिलीं। कांग्रेस का वोट शेयर 7% घटकर 34.1 फीसदी रह गया। चार सीटें जीत पाई।
  • तीन मुद्दे : उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा सरकार, बिजली और बदहाल सड़कें, इंडिया शाइनिंग और फीलगुड कैंपेन बेअसर।
  • 1999 : भाजपा ने 46.6 प्रतिशत वोट हासिल किए। 29 सीट जीती थी। कांग्रेस ने 43.9 फीसदी वोट पाकर 11 सीट पाई थी। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ अलग राज्य बन गया।
  • तीन मुद्दे : 13 महीने की अटल सरकार से सहानुभूति, बेरोजगारी-पलायन, अवैध खनन।

मप्र में ऐसे रहे लोकसभा परिणाम-

वर्ष-1998 (कुल सीटें 40)भाजपा-30
कांग्रेस-10
वर्ष-1999 (कुल सीटें 40)भाजपा-29
कांग्रेस-11
वर्ष-2004 (कुल सीटें 29)भाजपा-25
कांग्रेस-04
‌वर्ष-2009 (कुल सीटें 29)भाजपा-16
कांग्रेस-12
‌वर्ष-20014 (कुल सीटें 29)भाजपा-27
कांग्रेस-02