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राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से खुश हैं रायपुर की पहली महिला विधायक रजनी ताई

  • किराए के घर में रहीं, रिक्शे का उपयोग किया
  • अब शारीरिक अस्वस्थता से लड़ रही हैं रजनी उपासने

रायपुर. रजनी ताई उपासने… 41 साल पहले 1977 में रायपुर की विधायक बनीं। उनके पहले और बाद में कोई भी महिला यहां से विधायक नहीं बन सकी। आरएसएस, जनसंघ, जनता पार्टी और अब भाजपा में ताई कहने से ही दो ही महिलाओं की तस्वीर सामने आती है। एक रजनी ताई और दूसरी इंदौर की सुमित्रा महाजन (लोकसभा अध्यक्ष) की। 85 साल की ताई ने एक ही चुनाव लड़ा, लेकिन लोगों से इस तरह जुड़कर सेवा की कि चार दशकों बाद भी वे शहर के लोगों के दिलों और जेहन में आज भी हैं। ताई इन दिनों शारीरिक अस्वस्थता से लड़ने के बाद घर पर आराम कर रहीं हैं। ताई ने वर्तमान में राजनीति का दायरा बढ़ने और उसमें महिलाओं की सहभागिता बढ़ने पर प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने वर्तमान में राजनीति कर रही महिलाओं को संदेश दिया कि मैंने राजनीतिक क्षेत्र में कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि व सेवक के रूप में जो सेवा दी है, आप लोग पूर्ण प्रामाणिकता से और अपने जीवन में किसी तरह का दाग न लगे, ऐसी भारतीय नारी की पहचान बनाकर, जनसेवक बनकर निर्लिप्त भाव से सेवा करें। ताई का विवाह स्व. दत्तात्रेय उपासने से हुआ था। दत्तात्रेय आर्डिनेंस फैक्ट्री में थे। उनके 4 बेटे हैं जगदीश उपासने जो वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि भोपाल में कुलपति हैं। सच्चिदानंद उपासने भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हैं और गिरिश व हेमंत उपासने एलआईसी में हैं। 1967 में यह परिवार बालोद से रायपुर आ गया। यह पूरा परिवार आरएसएस से जुड़ा रहा।

जब कलेक्टर ने कहा- देशद्रोही हो, घर सील कर दूंगा

  1. 1975-77 में आपातकाल के दौरान रायपुर कलेक्टर रविंद्र शर्मा ने ताई को उनका तात्यापारा वाला घर सील करने की धमकी दे दी थी। उन्होंने कहा कि आप देशद्रोही हैं। दरअसल इस घर में संघ के कई नेता कुशाभाऊ ठाकरे, शांता राम जी, कमलाकर डोनगांवकर, केशव दवे जैसे नेता फरारी काटते और बैठकें करते थे। भूमिगत संघ नेताओं का सेंटर भी यही घर था। अप्पा खरे जेल भेज दिए गए तो ताई ने उनके दो महीने के बच्चे व पत्नी को अपने घर में ही बेटी की तरह रखा। ताई गुप्त साहित्य जेल ले जाती और बेटों द्वारा रात-रात भर साइक्लोस्टाइटल कर निकाले पर्चे घर-घर बंटवातीं। इसी बीच चुनाव हुए तो ताई ने पुरुषोत्तम कौशिक व बृजलाल वर्मा के लिए खूब काम किया। ये दोनों नेता जीते और केंद्रीय मंत्री बने।
  2. बेटे की नौकरी के लिए सिफारिश नहीं

    पूरी विधायकी के दौरान ताई किराए के घर पर ही रहीं। इस बीच बेटे जगदीश ने दो-तीन बार सरकारी नौकरी के लिए अर्जी लगाई। ताई ने सिफारिश करने से साफ मना कर दिया। बोलीं अपनी योग्यता और प्रतिभा से प्राप्त करो। कोई फरियादी कलेक्टोरेट या निगम का काम लेकर घर आता और गाड़ी में चलने का आग्रह करता तो ताई इनकार कर देतीं। रिक्शे पर वहां पहुंचती।

  3. अटल जी के कहने पर भी टिकट काट दी

    आपातकाल में बंद संघ नेताओं और ताई के बेटों की रिहाई हो गई। विधानसभा चुनाव घोषित हुए। 1977 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने टिकट मांगा ही नहीं था। उनको रायपुर शहर विधानसभा से टिकट दे दी गई। ताई की विधायकी को केवल ढाई साल ही हुआ था कि 1980 में जनता पार्टी की सरकार भंग कर दी गई। पुन: जब चुनाव हुए तो अटल बिहारी वाजपेयी के कहने के बावजूद उन्हें टिकट नहीं दिया गया।

  4. रमेश बैस को राजनीति में लेकर आईं

    काफी कम लोगों को यह पता है कि सात बार के रायपुर के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस को ताई ही राजनीति में लाईं। 1978 में जब नगर निगम के चुनाव हो रहे थे। बृजलाल वर्मा जनता पार्टी के अध्यक्ष थे। ब्राह्मणपारा वार्ड से पार्षद के लिए डॉ. रामजी बैस को टिकट देने का फैसला हुआ। उनका वहां अच्छा जनाधार था। बैस ने मना कर दिया। बोले मैं सिर्फ संघ का काम करूंगा। उन्होंने कहा रमेश को लड़ा दो। समाजवादी उनके विरोध में उतर आए, लेकिन ताई अड़ गईं। लोग नहीं माने तो उन्होंने इस्तीफे की धमकी दे दी। बोलीं मैं विधायक हूं मेरे विधानसभा क्षेत्र का मामला है। टिकट तो देना पड़ेगा रमेश को। वर्मा ने सबको मनाया। टिकट मिली, बैस जीते। उनका राजनीतिक सफर शुरू हो गया जो अब तक 40 वर्षों से जारी है।

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