Tue. Oct 15th, 2019

महासमुंद : हाथी के प्रकोप से बचने को बनाई प्रतिमा, मनाया त्योहार

इस वर्ष ग्राम कुकराडीह में हाथी की बाकायदा प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा-अर्चना की गई।

महासमुंद-महासमुंद जिले के कई इलाके हाथी प्रभावित हैं। ओडिशा के जंगलों से निकलकर यहां पहुंचने वाले हाथी इन दिनों भी कई इलाकों में फसल को बर्बाद कर रहे हैं। हाथी के हमले से जिले में कई मौतें हो चुकी हैं। यही वजह है कि सिरपुर क्षेत्र के आस्थावान ग्रामीण हाथियों को प्रसन्न करने के लिए हाथी त्योहार मनाते आ रहे हैं, लेकिन इस वर्ष ग्राम कुकराडीह में हाथी की बाकायदा प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा-अर्चना की गई।

इस मौके पर बड़ी संख्या में कई ग्रामीण जुटे। खीर का प्रसाद भी बांटा गया। हाल ही में गणेशोत्सव संपन्न हुआ है। भगवान गणेश के गजानन स्वरूप के चलते हाथी हिंदू धर्म में पूजनीय रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जंगली हाथियों से नुकसान की खबरें भी आए दिन जिले में आती रहती हैं।

यही वजह है कि आस्थावान ग्रामीण हाथी के कोप से बचने के लिए उसकी पूजा करते आ रहे हैं। तुमगांव से सात किमी दूर ग्राम कुकराडीह बंजर में इस वर्ष हाथी की विशाल प्रतिमा बनाई गई है। मंगलवार को यहां हाथी त्योहार मनाया गया। सारे ग्रामीण कामकाज की छुट्टी कर इसमें शामिल हुए।

पहले हाथी की प्रतिमा का अनावरण किया गया। विधि-विधान से उसकी स्थापना की गई। गांवभर के लोगों ने प्रतिमा के सामने श्रद्धा से पूजा-अर्चना कर फसल और जन-धन की सुरक्षा की कामना की। अंत में खीर का प्रसाद बांटा गया। ग्रामीणों ने बताया कि जिस तरह गांव-गांव में सांहड़ा देव की प्रतिमा होती है। लोग आस्था से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। उसी तरह से हाथी प्रतिमा की स्थापना की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि बस्ती फंड से 60 हजार रुपए खर्च कर यह प्रतिमा बनाई गई है।

हाथियों का पसंदीदा स्थल है कुकराडीह बंजर

जिस स्थान पर हाथी की प्रतिमा स्थापित की गई है, वह उनका पसंदीदा स्थान है। महानदी से लगे इस स्थान पर आए दिन हाथियों की आमद रहती है, इसीलिए यह स्थान प्रतिमा स्थापना के लिए चयनित किया गया।

गांव में रहा उत्सव का माहौल

हाथी त्योहार पर कुकराडीह में उत्सव का माहौल रहा। लोग नए कपड़े पहने हुए थे। कामकाज के सिलसिले में दूरदराज जाने वाले ग्रामीण भी इसमें शामिल होने पहुंचे थे। हाथी की प्रतिमा का दर्शन करने आसपास के ग्रामीणजन भी पहुंचे। अनावरण के दौरान प्रतिमा पर पुष्पवर्षा की गई। फूलों की माला पहनाई गई।

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