Thu. Jun 20th, 2019

महाभारत छत्तीसगढ़ / विलुप्त होती लोककलाओं को बचाने पर ध्यान दें, वरना हम खो बैठेंगे हमारी इन धरोहरों को

डॉ. तीजन बाई
पद्मभूषण, अंतरराष्ट्रीय पंडवानी गायिका 

 

चुनाव आ रहा है। सभी पार्टी अपनी-अपनी तैयारी में हैं। मैं कोई राजनीतिक बात नहीं कहना चाहती। चूंकि मैं कलाकार हूं। मुझे विलुप्त होती कलाओं की स्वाभाविक चिंता होती है। ऐसी कलाओं को लेकर शोध होना चाहिए। उन्हें संवारने की पहल की जानी चाहिए। सत्ता में कोई भी हो, यह कला एवं परंपराओं को बनाए रखना सरकार की स्वाभाविक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

 

मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बना। यह संयोग है कि हमारा छत्तीसगढ़ विविध कलाओं, परंपराओं एवं संस्कृतियों से बेहद समृद्ध प्रदेश है। ग्रामीण परिवेश में आप थोड़ी परख लेकर जाएं तो उत्कृष्ट कलाकार आपको राज्य के हर कोने में मिलेंगे। बस्तर और सरगुजा के रूप में आदिवासियों का एक बड़ा समूह प्रदेश में है। इनकी सांस्कृतिक करतबों का लोहा दुनिया मानती आई है। वक्त और जरूरत है ऐसे कलाकारों को प्रोत्साहन देने की और ये हम सबकी जिम्मेदारी है। प्रदेश ने देश को कई बड़े कलाकार दिए हैं।

अभी कला और कलाकारों की हालत क्या है, यह सबको पता है। हमें इनकी चिंता तो करनी ही होगी। समय रहते चिंता और जतन नहीं किया तो निश्चित ही हमारी धरोहर संस्कृति नष्ट हो जाएगी। व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन का राग खत्म हो जाएगा। कला भोग-विलास की अपेक्षा नहीं रखती। उसे सिर्फ पूछ-परख, बुनियादी जरूरतें पूरी करने की क्षमता और सम्मान चाहिए। एक बार फिर चुनाव सामने है। एक ऐसा लोकतांत्रिक पर्व, जब हम अपना जनप्रतिनिधि चुन सकते हैं। ऐसा जनप्रतिनिधि, जिसे हमारी चिंता हो, हमारी समस्याओं की जानकारी हो और उन्हें सुलझाने का रास्ता भी तलाश सके। हमें वोट जरूर देना चाहिए, ताकि लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।