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छत्तीसगढ़ / दो साल से कम होती गई रेणु की कांग्रेस में पूछ-परख, टिकट कटने पर सोनिया गांधी को लिखा पत्र

  • जून 17 में अजीत जोगी के नई पार्टी बनाने के बाद से रेणु जोगी को कांग्रेस ने साइडलाइन करना शुरु कर दिया था
  • कोंटा से विधायक हैं, लेकिन इस बार पार्टी ने उनकी टिकट काटने से गुरेज नहीं कियारायपुर. जून 17 में अजीत जोगी के नई पार्टी बनाने के बाद से रेणु जोगी को कांग्रेस ने साइडलाइन करना शुरु कर दिया था। अंतत: पार्टी ने कोंटा से उनकी टिकट कटने से भी गुरेज नहीं किया। अपने साथ हुए इस व्यवहार के बाद कांग्रेस विधायक रेणु जोगी ने सोनिया गांधी को बेहद भावुक पत्र लिखा है। सोनिया गांधी को लिखा पत्र हूबहू प्रस्तुत है :-

     

    ‘मैंने कभी कल्पना भी नही की थी कि मेरे जीवन से जुड़े निर्णय आपको बताने के लिए मुझे आपको पत्र लिखने की आवश्यकता पड़ेगी। तीन दशकों से भी ज्यादा  हो गए, हमारे बीच संबंध इतने प्रगाढ़ हैं कि मेरे और आपके परिवार में कभी कोई परायापन नहीं रहा। आपने मुझे बहुत प्यार और सत्कार दिया। मैंने भी आपके प्यार का सम्मान करते हुए बराबरी से हर प्रतिकूल परिस्थिति में आपका साथ दिया।

     

    मेरे पति और गांधी परिवार के प्रति सर्वोच्च  निष्ठा रखने वाले, जोगी जी जब अपमानित होकर, कांग्रेस से अलग हुए और अपनी नई पार्टी बनाई तब भी  मैंने कांग्रेस और गांधी परिवार को अपने परिवार से ऊपर रखा और कांग्रेस पार्टी की सेवा करती रही। जोगी जी द्वारा नई पार्टी बनाने के बाद, उनको रोकने और अपना राजनीतिक हित साधने, उनके विरोधियों ने मुझे निशाना बनाया।

     

    मेरे खिलाफ कांग्रेस के ही के नेताओं ने झूठा अभियान चलाया, मैं चुप रही। मुझे सदन में उपनेता के पद से हटाया, मैं चुप रही। सदन के भीतर मुझ पर मेरे ही पार्टी के लोगों ने तंज कसे, मैं चुप रही। फ़र्ज़ी सीडी लाकर मेरे पति और पुत्र को बदनाम किया गया, मैं चुप रही। मैं दो वर्षों से निरंतर अपमानित होती रही लेकिन कभी भी आपको एक शब्द नही बताया, मैं चुप रही।

     

    हमेशा पार्टी हित के लिए चुपचाप सब सहती रही। एक क्षण के लिए भी मुझे ऐसा नही लगा कि आप मेरे साथ नही खड़ी हैं। लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था। अंत में आखिर वही हुआ जो कांग्रेस के हितैषी नही बल्कि जोगी जी के विरोधी चाहते थे। जिस कोटा विधानसभा क्षेत्र को मैंने अपने परिवार की तरह पाला और सेवा की, उसे ही मुझसे आज छीन लिया गया।

     

    मेरी सरलता, मासूमियत, मेरे त्याग और निष्ठा को जानबूझ कर एक षड्यंत्र के तहत द्वेष, ईर्ष्या और संकीर्ण राजनीति के चश्मे से देखा गया और आज उस षड्यंत्र को अंजाम तक पहुँचाने, मेरे अस्तित्व को मिटाने का प्रयास हुआ है। अब तक बात मेरे परिवार तक सीमित थी लेकिन आज मेरे कोटा वासियों से मुझे दूर करने का अनैतिक और अन्यायपूर्ण कृत्य हुआ है।

     

    मुझे कोंटा से कोई अलग नहीं कर सकता। मैंने अपना शेष जीवन कोटावासियों को समर्पित कर दिया है। मैं कोटा से चुनाव लड़ूँगी यह साबित करने के लिए कि सच चुप रहता है पर इसका मतलब यह नही कि वो पराजित हुआ। मुझे विश्वास है कि अंत में सच की ही जीत होगी।

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