अंजीर: विश्व के सबसे पुराने फल का इतिहास और फायदे बेहद रोमांचित करने वाले है..!

अंजीर विश्व के सबसे पुराने फलों मे से एक है। इंसानी सभ्यता को इसके बारे में लाखों सालों से जानकारी हैं। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्राचीन यूनान में लोग इसे इतना पसंद करते थे कि ज्यादा उत्पादन होने के बाद भी इसके निर्यात पर पाबंदी थी ।

यह फल रसीला और गूदेदार होता है। इसका रंग हल्का पीला, गहरा सुनहरा या गहरा बैंगनी हो सकता है। । अंजीर अपने सौंदर्य एवं स्वाद के लिए प्रसिद्ध अंजीर एक स्वादिष्ट, स्वास्थ्यवर्धक और बहुउपयोगी फल है।

घरेलू उपचार में ऐसा माना जाता है कि स्थाई रूप से रहने वाली कब्ज़ अंजीर खाने से दूर हो जाती है। जुकाम, फेफड़े के रोगों में पाँच अंजीर पानी में उबाल कर छानकर यह पानी सुबह-शाम पीना चाहिए। दमा जिसमे कफ (बलगम) निकलता हो उसमें अंजीर खाना लाभकारी है इससे कफ बाहर आ जाता है। कच्चे अंजीरों को कमरे के तापमान पर रख कर पकाया जा सकता है लेकिन उसमें स्वाभाविक स्वाद नहीं आता। घरेलू उपचारों में अंजीर का विभिन्न प्रकार से प्रयोग किया जाता है।

अंजीर में भरपूर मात्रा में तांबा , सल्फर और क्लोरिन पर्याप्त मात्रा में होते हैं। ताजे अंजीर में विटामिन ए अत्याधिक पाया जाता है। जबकि विटामिन बी और सी सामान्य होता है।

अंजीर की खेती..!

अंजीर किसी भी गर्म इलाके में आसानी से होने वाला पौधा है हालांकि भारत में इसकी खेती के लिए राजस्थान काफी मशहूर है रेतीली भूमि पर इसका खेती करना काफी आसान होता है साथ ही साथ इसमें गर्मी और कोहरे को सहन करने की अद्भुत क्षमता होती है

राजस्थान के अलावे भारत के, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात तथा उत्तर प्रदेश के कुछ भागो इसकी खेती की जाती है। बिहार में भी अब बहुत किसानों के द्वारा इसका उत्पादन किया जाने लगा है।

उपयुक्त जलवायु..!

अंजीर की खेती भिन्न-भिन्न प्रकार की जलवायु में की जा सकती है, लेकिन अंजीर का पौधा गर्म, सूखी और छाया रहित उपोष्ण व गर्म-शीतोष्ण परिस्थितियों में अच्छी तरह फलता-फूलता है।

भूमि का चयन..!

अंजीर को सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, परंतु दोमट अथवा मटियार दोमट, जिसमें उत्तम जल निकास हो, इसके लिए सबसे श्रेष्ठ मिट्टी है|

पौधे तैयार करना..!

अंजीर के पौधे मुख्यतः 1 से 2 सेंटीमीटर मोटी, 15 से 20 सेंटीमीटर लम्बी परिपक्व कलमों द्वारा तैयार किये जाते हैं| मातृ पौधों से सर्दियों में कलमें लेकर इन्हें 1 से 2 माह तक कैल्सिंग हेतु मिट्टी में दबाया जाता है| फरवरी से मार्च में जैसे ही तापमान बढ़ने लगता है, इल कलमों को निकाल कर 15 x 15 सेंटीमीटर की दूरी पर नर्सरी में रोपित किया जाता है|

अंजीर की नर्सरी की क्यारियों में प्रति वर्गमीटर 7 किलो गोबर की खाद तथा 25 से 30 ग्राम फॉस्फोरस और 20 से 25 ग्राम पोटाश खाद, क्यारी तैयारी के समय डालनी चाहिए| नत्रजन खाद 10 से 15 ग्राम प्रतिवर्गमीटर कलमें रोपित करने के एक महीने बाद तथा इतनी ही मात्रा 2 महीने बाद डालनी चाहिए।

फलों की तुड़ाई और पैदावार..!

फल मई से लेकर अगस्त तक पककर तैयार होते हैं| जब फल पूर्ण रूप से परिपक्व हो जाये तब ही इनकी तुड़ाई करनी चाहिए| तोड़ने के बाद एक पात्र में 400 से 500 ग्राम से ज्यादा फल नहीं रखने चाहिए| यदि ज्यादा मात्रा में फलों का तुड़ान करना हो तो इन्हें पानी भरे बर्तन में एकत्रित करना चाहिए।