अमेरिका की इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी टेस्ला के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क ने कहा कि भारत में उत्पाद उतारने के लिए उसे सरकार के स्तर पर बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, वह भारत में तीन मॉडल पेश करने की तैयारी में लगे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मस्क की कोशिश सरकार से मोलभाव कर टैक्स छूट हासिल करना है] जिसमें उन्हें फिलहाल सफलता मिलती नहीं दिख रही है।

तेजी से बढ़ रहा भारतीय बाजार

भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन के बाजार में कंपनियों का आकर्षण उसकी तेज रफ्तार है। मोरडोर इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार वर्ष 2026 तक बढ़कर 47 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना संकट के बावजूद भारत सरकार की नीतियों की वजह से यहां इलेक्ट्रिक वाहन बाजार को उम्मीद से तेज वृद्धि हो रही है।

सरकार की क्या है तैयारी

सरकार ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहन को लेकर कई तरह की रियायतें दे चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक निजी वाहनों में 30 फीसदी, वाणिज्यिक वाहनों में 70 फीसदी, बसों में 40 फीसदी और दोपहिया एवं तिपहिया में 80 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन की हिस्सेदारी करना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे तेल आयात पर खर्च होने वाली भारी विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

पहले भारत में बनाएं फिर छूट की बात करें

टेस्ला भारत में कार निर्माण करने की बजाय यहां आयातित कारें बेचना चाहती है। टेस्ला ने कई मंचों से अपनी यह बात कही है कि भारत सरकार इलेक्ट्रिक कारों पर आयात शुल्क कम करे। हालांकि, भारी उद्योग मंत्रालय टेस्ला को खरी-खरी बोल चुका है कि टेस्ला भारत में आकर पहले कार बनाए फिर किसी छूट पर विचार होगा। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि टेस्ला को छूट देकर पूरे उद्योग को वह गलत संदेश नहीं देना चाहती क्योंकि कई देसी कंपनियों ने यहां भारी निवेश किया है।

टेस्ला के लिए आसान नहीं भारतीय बाजार

वाहन बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में मुकाबला करना आसान नहीं है। यहां टाटा और महिन्द्रा जैसी देसी कंपनियों के साथ मारुति, हुंडई, एमजी, मर्सिडिज,ऑडी और जेएलआर जैसी कंपनियां पहले से ही बाजार में अपने उत्पाद के साथ मौजूद हैं। ऐसे में एक या दो मॉडल के दम पर टेस्ला के लिए भारतीय बाजार बेहद चुनौती भरा है।

एक चार्ज में कितनी दूर चलती है कार

सामान्य तौर पर 15 केएमएच बैट्री से कार 100 किलोमीटर तक चल सकती है। ऐसे में इलेक्ट्रिक कार की बैट्री के हिसाब से इसकी तय की जाने वाली दूरी का अंदाजा लगाया जा सकता है। भारत में भी टाटा की नेक्सन, टिगोर और हुंडई को कोना में लिथियम बैट्री लगी है जिससे वह एक बार चार्ज करने पर 300 से 500 किलोमीटर तक चलती हैं। वहीं, टेस्ला की कुछ कारें एक बार चार्ज करने पर 500 से किमी तक चलती हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक कारें अधिक गति से चलाने पर तय से कम दूरी तक ही चलती हैं।

अगले साल आएगी सबसे सस्ती कार

भारत में अगले साल देसी कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार लॉन्च करने की तैयारी में है। मामले से जुड़े सूत्रो का कहना है कि इसका नाम नाम महिंद्रा केयूवी इलेक्ट्रिक (ईकेयूवी100) होगा। इसकी कीमत 10 लाख रुपये से कम रहने की उम्मीद है।

भारत में मौजूदा इलेक्ट्रिक कारों के दाम

  • टाटा टिगोर ईवी 11.99 लाख
  • टाटा नेक्सन ईवी 14.24 लाख
  • एमजी ज़ेडएस ईवी 21.00 लाख
  • हुंडई कोना इलेक्ट्रिक 23.79 लाख
  • जैगुवार आई-पेस 1.06 करोड़
  • ऑडी ई-ट्रोन जीटी 1.80 करोड़
  • पोर्शे टायकन 1.50 करोड़
  • मर्सिडीज बेंज ईक्यूसी 1.07 करोड़

(दाम शुरुआती एक्सशोरूम रुपये में)