आभाषी मुद्रा (क्रिप्टोकरंसी) को लेकर सरकार ने फिर से सख्त संदेश दिया है। सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में स्पष्ट कहा कि सरकार की देश में क्रिप्टोकरंसी बिटक्वाइन को करंसी के रूप में मान्यता देने की कोई योजना नहीं है। रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास कई मौकों पर कह चुके हैं कि क्रिप्टोकरंसी में छोटे निवेशकों की पूंजी डूबने के साथ मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिग जैसे कई खतरे मौजूद हैं।

सरकार शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरंसी के नियमन के लिए बिल लाने की तैयारी में है। वित्त मंत्री के इस स्ष्टीकरण के पहले क्रिप्टोकरंसी उद्योग में इस तरह की चर्चा थी कि सरकार बिटक्वाइन पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाएगी। वित्त मंत्री ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह भी कहा कि सरकार बिटक्वाइन के लेनदेन के आंकड़े एकत्र नहीं करती है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में देश में क्रिप्टोकरंसी के उपयोग के संबंध में न तो कोई प्रतिबंध है और न ही कोई नियमन है। हालांकि, रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय समय-समय पर यह चेतावनी देते रहे हैं कि नियमन नहीं होने से क्रिप्टोकरंसी में निवेश करना खतरे से खाली नहीं है और निवेशक इससे बचकर रहें।

सुप्रीम कोर्ट ने दी थी राहत

वर्ष 2018 में रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज रिजर्व बैंक के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए जहां शीर्ष अदालत ने वर्ष 2020 में आरबआई के प्रतिबंध को हटा दिया था। इसके बाद भी रिजर्व बैंक समय-समय पर निवेशकों के हित में क्रिप्टोकरंसी को लेकर चेतावनी जारी करता रहा है। अब क्रिप्टोकरंसी बिल के जरिये कानून बनानकर नियमन के दायरे में लाने की तैयारी है।

आरबीआई को छोटे निवेशकों की चिंता

दास का कहना है कि आरबीआई की चिंता छोटे निेवशकों को लेकर है। उनका कहना है कि भारत में क्रिप्टोकरंसी में 500 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक निवेश करने वाले लोगों की संख्या 80 फीसदी है और इनमें भी युवाओं की संख्या अधिक है। उनका कहना है कि क्रिप्टोकरंसी में उतार-चढ़ाव तेज होता है। इसमें इन निवेशकों की पूंजी डूबने की आशंका अधिक होती है।

संसदीय समिति ले रही राय

पूर्व वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा के नेतृत्व में एक ससंदीय समिति भारत में क्रिप्टोकरंसी पर विशेषज्ञों की राय ले रही है। हालांकि, समिति की पिछले दिनों बैठक में किसी मुद्दे पर एक राय नहीं बन सकी। समिति का मानना है कि क्रिप्टोकरंसी को नियमन के दायरे में लाना निवेशकों के हित में जरूरी है। लेकिन इसपर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से भारत इसमें मिलने वाले वैश्विक अ‌वसरों में पीछो रह सकता है। ऐसे में दोनों मुद्दों को ध्यान में रखकर कारगर उपाय की तलाश की जा रही है।

मुठ्टी भर क्रिप्टोकरंसी ही रह जाएंगी

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने पिछले दिनों कहा था कि मौजूदा समय में दुनिया में हजारों की संख्या में क्रिप्टोकरंसी हैं, लेकिन अगले कुछ साल में एक-दो या मुठ्टी भर क्रिप्टोकरंसी ही रह जाएंगी। एक अनुमान के अनुसार मौजूदा समय में छह हजार से ज्यादा क्रिप्टोकरंसी दुनिया में हैं।

परंपरागत मुद्रा नहीं बन पाएगी

पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा का कहना है कि क्रिप्टोकरंसी के बारे में इस समय भ्रम की स्थिति है। उन्होंने कहा, हर सरकार इसे लेकर संशयग्रस्त है और क्रिप्टोकरंसी परंपरागत मुद्रा की जगह नहीं ले पाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि क्रिप्टोकरंसी को लेकर जताई जा रही तमाम आपत्तियों के बावजूद यह बनी रहने वाली है और अगले पांच वर्षों में यह मुख्यधारा की प्रौद्योगिकी बन जाएगी।