भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय माह मार्गशीर्ष माह में कई उत्सव और त्योहार मनाए जाते हैं। मृगशिरा नक्षत्र से संबंध होने के कारण इस माह का नाम मार्गशीर्ष पड़ा। इस माह श्रद्धा और भक्ति से प्राप्त किए पुण्य से सभी सुखों की प्राप्ति होती है। इस माह नदी में स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है।

इस मास में शुक्ल पंचमी को विवाह पंचमी कहा जाता है। माना जाता है कि प्रभु श्रीराम-सीता का विवाह इसी दिन संपन्न हुआ था। यह दिन मांगलिक कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस माह आने वाली उत्पन्ना एकादशी को भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास किए जाते हैं। इस मास की अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। मार्गशीर्ष माह में कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को मार्गशीर्ष अमावस्या होती है। मार्गशीर्ष अमावस्या पर पितरों का पूजन और व्रत करने से पितृ दोष समाप्त हो जाता है। परिवार में सुख और संपन्नता आती है। पितृ पूजन के लिए यह विशेष दिन बताया गया है। इस मास की पूर्णिमा को दत्त पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा की जाती है। इस माह अपने पूर्वजों का स्मरण करें और उनके प्रति आभार प्रकट करें। इस माह अन्न दान करना सर्वश्रेष्ठ पुण्य कर्म माना गया है। ऐसा करने पर सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। मार्गशीर्ष माह में गुरुवारी पूजा में माता लक्ष्मी को प्रत्येक गुरुवार को अलग-अलग व्यंजनों का भोग लगाने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस माह भगवान शिव का कच्चे दूध और दही से अभिषेक करें और काले तिल अर्पित करें। शाम को घी का दीपक शिवालय में जलाएं। इस माह भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा अवश्य करें। भगवान श्री हरि विष्णु के मंदिर में पीले रंग का ध्वज अर्पित करें।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।