इंसान के शरीर में बिना रुके और बिना थके लगातार 24 घंटे काम करने वाला अंग दिल होता है। दिल की सेहत का सही ढंग से ध्यान रखना सबके लिए जरूरी है। आज के समय में असंतुलित खानपान और खराब जीवनशैली के कारण दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ता जा रहा है और यही वजह है कि युवावस्था में भी लोगों को हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी दिल से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो रही हैं। दिल से जुड़ी तमाम बीमारियां तनाव (स्ट्रेस) और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं के कारण भी हो सकती हैं। हर इंसान की तनाव झेलने की क्षमता अलग-अलग होती है और एक स्तर तक ही व्यक्ति तनाव जैसी समस्या को कंट्रोल में रख सकता है। आज के समय में लोगों में कामकाज के प्रेशर, रिश्तों में अनबन और आर्थिक स्थितियों के कारण कई तरह की मानसिक समस्याएं हो रही हैं। इन समस्याओं के बढ़ने पर आपको कई तरह की दिक्कतें तो होती ही हैं लेकिन इनकी वजह से आपको दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का भी सामना करना पड़ सकता है। डिप्रेशन और स्ट्रेस के लंबे समय तक बने रहने के कारण आपको दिल से जुड़ी इन बीमारियों का खतरा होता है। आइये एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ संतोष कुमार डोरा (Dr. Santosh Kumar Dora) से जानते हैं इन बीमारियों के बारे में।

मानसिक स्वास्थ्य और दिल के सेहत के बीच में संबंध (Connection Between mental Health and Heart Health)

लंबे समय तक तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्या से जूझने वाले लोगों में दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई शोध और अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि तनाव जब क्रॉनिक हो जाता है तो मरीज को ब्लड प्रेशर में उतार चढ़ाव की समस्या का सामना करना पड़ता है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ संतोष कुमार डोरा के मुताबिक, “कई अध्ययनों से पता चला है कि लंबे समय तक तनाव के कारण दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लोग जिन्हें लंबे समय से तनाव की समस्या होती है उनमें व्यायाम की कमी, असंतुलित भोजन का सेवन और धूम्रपान व शराब के सेवन के कारण मोटापे से पीड़ित हो जाते हैं। मोटापा बढ़ने पर ऐसे लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटिक मेलिटिस और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या के शिकार हो सकते हैं। अगर ये समस्याएं मरीज में लंबे समय तक बनी रहती हैं तो इसकी वजह से दिल से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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स्ट्रेस की वजह से बढ़ जाता है दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा (Stress Increase Heart Disease Risk)

लंबे समय से तनाव की समस्या के कारण शरीर में एड्रेनलीन हॉर्मोन तेजी से रिलीज होता है जिसकी वजह से ब्लड प्रेशर में अचानक उतार-चढ़ाव महसूस करना पड़ता है। ब्लड प्रेशर में अचानक उतार चढ़ाव के कारण क्रॉनिक हार्ट डिजीज का खतरा बना रहता है। कई बार लगातार स्ट्रेस के कारण मरीज को हार्ट सिंड्रोम होने का खतरा भी बढ़ जाता है। शरीर में एड्रेनलीन हॉर्मोन हॉर्मोन के बढ़ने के कारण सांस लेने में दिक्कत या सांस की रफ्तार बढ़ सकती है। इसके अलावा कार्टिसोल के बार-बार रिलीज होने के कारण ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल आदि बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। यही कारण है कि बहुत ज्यादा तनाव या अधिक समय से तनाव में रहने के कारण दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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डिप्रेशन की वजह से हार्ट डिजीज का खतरा (Depression And Risk of Heart Disease)

लंबे समय से स्ट्रेस या तनाव की तरह ही डिप्रेशन की समस्या में भी हार्ट से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। अवसादग्रस्त व्यक्ति का खानपान, शारीरिक गतिविधि बिलकुल अलग हो जाती है। इसके अलावा चिंता या अवसाद की वजह से आपको हाई ब्लड प्रेशर और ब्लड सर्कुलेशन में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। कई शोध और अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि डिप्रेशन की समस्या लंबे समय तक बनी रहने के कारण आपको हार्ट स्ट्रोक, हार्ट फेलियर समेत कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

हार्ट डिजीज से बचाव के टिप्स (Heart Disease Prevention Tips)

स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी समस्या के लंबे समय तक शिकार होने के कारण आपको दिल से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा होता है। चिंता और तनाव के कारण आपके ब्लड प्रेशर के स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है जिसकी वजह से आपको कई समस्याएं होती हैं। तनाव और डिप्रेशन के कारण होने वाली दिल की बीमारियों से बचाव के लिए इन बातों का ध्यान जरूर रखें।

  • तनाव और चिंता की समस्या बढ़ने पर एक्सपर्ट डॉक्टर से इलाज जरूर कराएं।
  • खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव करें।
  • अल्कोहल के सेवन से बचें।
  • स्मोकिंग की लत को छोड़ें।
  • जंक फूड्स या प्रोसेस्ड फूड का सेवन न करें।
  • चीनी और साल्ट के सेवन से भी परहेज रखें।
  • हार्ट के लिए फायदेमंद ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें।
  • रोजाना एक्सरसाइज या योग जरूर करें।
  • सकारात्मक दृष्टिकोण (पॉजिटिव थिंकिंग) बनाए रखें, इससे स्ट्रेस को दूर करने में फायदा मिलेगा।
  • लक्षण दिखने पर लापरवाही न बरतें।
  • समय-समय पर हार्ट हेल्थ की जांच कराएं।
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ऊपर बताई गयी बातों का ध्यान रखकर आप स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं के कारण दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों के खतरे से बच सकते हैं। स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं के लक्षण दिखने पर इनसे बचाव के लिए एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। इन समस्याओं को नजरअंदाज करना आप पर भारी पड़ सकता है। इसके अलावा समय-समय पर अपने दिल के सेहत की जांच जरूर करें।

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