Share

Contents

  • 1 Veerasana Benefits & Steps in Hindi – वीरासन योग, फ़ायदे और विधि
    • 1.1 वीरासन क्या है? What is Veerasana in Hindi?
    • 1.2 वीरासन करने की विधि – Steps to Practice Veerasana in Hindi
    • 1.3 पूर्व एवं पश्चात आसन – Preparatory & Post Virasana Poses
    • 1.4 वीरासन के 7 प्रभावशाली स्वास्थ्य लाभ – 7 Amazing Health Benefits of Veerasana Yoga
      • 1.4.1 1. जोड़ों का दर्द – Veerasana for Joints Pain
      • 1.4.2 2. बवासीर – Virasana Yoga for Piles
      • 1.4.3 3. मासिक धर्म – Veerasana for Menstrual Problems
      • 1.4.4 4. पाचन – Veerasana for Improved Digestion
      • 1.4.5 5. पैरों का सूजन – Hero Pose or Veerasana Yoga for Swollen Legs
      • 1.4.6 6. तनाव और थकान – Veerasana for Stress & Fatigue
      • 1.4.7 7. उच्च रक्तचाप और अस्थमा – Virasan for High Blood Pressure & Asthma
    • 1.5 वीरासन कब और कितनी देर करना चाहिए? – Practice Time & Duration of Veerasana Yoga in Hindi
    • 1.6 वीरासन के अभ्यास से जुड़ी सावधानियां – Precautions of Veerasana Practice
    • 1.7 अंत में
        • 1.7.0.1 Sweta Kishore
      • 1.7.1 How To Grow Nails Faster At Home In Hindi – नाखून बढ़ाने के घरेलू नुस्खे
      • 1.7.2 अश्वगंधा के फायदे – Ashwagandha Ke Fayde (in Hindi)
      • 1.7.3 कटहल के स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे – Health Benefits of Jackfruit in Hindi
      • 1.7.4 Quinoa Meaning in Hindi & Amazing Benefits – किनोवा क्या हे, फायदे और उपयोग
      • 1.7.5 Related

Veerasana Benefits & Steps in Hindi – वीरासन योग, फ़ायदे और विधि

वीरासन योग अथवा हीरो पोज़ के नाम से प्रसिद्ध यह योगासन आपके कमरदर्द, पीठ दर्द अथवा घुटने में दर्द की समस्या को दूर करने का राम-बाण उपाय है। आइये जानते हैं क्या है वीरासन करने की विधि और इसके लाभ – Veerasana Benefits and Steps in Hindi

Image Source: Yoga Journal

योग करने से न केवल आप शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं बल्कि नियमित योगभ्यास आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी बनाए रखने में सहायता करता है। ऐसा ही एक कारगर और प्रभावशाली आसन है – वीरासन (Hero Pose)

प्राचीन काल से इस आसन का उपयोग शरीर से जुड़ी तकलीफों को दूर करने के लिए किया जाता रहा है। और आज इक्कीसवी शताब्दी में भी वीरासन ने अपनी महत्ता कायम रखी है।

कई योग गुरु एवं योगा एक्सपर्ट्स शरीर के जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए वीरासन करने की सलाह देते हैं। हालांकि इसके अलावा भी वीरासन का अभ्यास, बवासीर, मूत्राशय एवं स्त्रियों के मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियों से राहत दिलाने में कारगर है।

इसलिए आइये जानते हैं अनेकों स्वास्थ्य लाभ देने वाले इस अद्भुत योगासन – वीरासन के विषय में। साथ ही जानेगें इसे करने की विधि और इसके 7 प्रभावशाली लाभ – Virasana Yoga Ke 7 Adbhut Fayde

वीरासन क्या है? What is Veerasana in Hindi?

वीरासन शब्द दो शब्दों के संधि से बना है – वीर तथा आसन। अगर वीरासन शब्द का शाब्दिक अर्थ देखें तो इसका मतलब होता है, वीरों द्वारा किया जाने वाला आसन।

प्राचीन काल मे जो योद्धा होते थे, वे वीरासन में ही बैठते थे। यह उनकी शक्ति, सामर्थ्य और मानसिक बल को बढ़ाता था एवं इस आसन को करने वाला प्रत्येक व्यक्ति वीरों के समान ही गुण प्राप्त कर सकता है।

यह एक बैठ कर किये जाने वाला आसन है, जिसका सबसे पहला उल्लेख आठवीं शताब्दी के “पतंजलयोगशास्त्रविवर्णा” में मिलता है। समय के साथ, इसे कई विविध तरीकों और बदलावों के साथ अपनाया गया है।

वीरासन करने की विधि – Steps to Practice Veerasana in Hindi

किसी भी योगासन को करने से पूर्व उसकी उचित विधि का ज्ञान होना ज़रूरी होता है। अन्यथा इसके दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। इसलिए वीरासन करने का सही तरीका क्रमशः (Step by Step) आपको बताया गया है। आइये देखते हैं –

  1. वीरासन करने से पहले एक शांत स्थान पर योगा मैट बिछाएं और घुटनों के बल, फर्श पर बैठ जाएं।
  2. अपनी एड़ियों को अपने हिप्स के सीधे नीचे रखें।
  3. अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें और अपने घुटनों को पास लाने की कोशिश करें।

वीरासन में बैठने का तरीका – How to Sit Properly in Virasana Yoga

  1. अब बताई गई स्थिति में बैठने के बाद, अपनी एड़ियों के बीच के फर्क को बढ़ने दें। आपके एड़ियों के बीच की दूरी, आपके हिप्स की चैड़ाई से ज़्यादा होनी चाहिए।
  2. अब अपने पांव के टॉप को ज़मीन पर स्थिर रखने का प्रयास करें।
  3. अपने हिप्स को नीचे लाएं जिससे आप अपने नितम्भ (Buttocks) पर बैठ सकें। पिंडली (Calf) की मासंपेशियों को बाहर की ओर मोडें।
  4. तत्पश्चात यह सुनिश्चित करलें की आपके हिप्स आपके हील्स के बीचों-बीच हों और आपके तलवे पीछे, बाहर की तरफ मुड़े हुए हों।
  5. यह देख लें कि आपके टखने अंदर मुड़े हुए हों और अपनी नाभि को गहरा खींचने की कोशिश करें।
  6. बताए गए आसन में 30 सेकंड तक बने रहें। और धीरे-धीरे खुद को आसन से बाहर ले आएं।

पूर्व एवं पश्चात आसन – Preparatory & Post Virasana Poses

वीरासन करने से पहले बद्ध कोणासन और बालासन का अभ्यास करना लाभदायक होता है। एवं वीरासन करने के उपरांत आप पद्मासन और बकासन का अभ्यास कर सकते हैं।

वीरासन के 7 प्रभावशाली स्वास्थ्य लाभ – 7 Amazing Health Benefits of Veerasana Yoga

वीरासन शरीर की कई समस्याओं से निजाद पाने में कारगर है और इसके नियमित अभ्यास से सामान्य जीवनशैली में होने वाले रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है। आइये विस्तार से जानें, वीरासन से होने वाले 7 प्रभावशाली स्वास्थ्य लाभ क्या हैं –

1. जोड़ों का दर्द – Veerasana for Joints Pain

Virasana Benefits in Hindi-TopPaanch

बढ़ती उम्र के साथ लोगों को जोड़ो में दर्द की समस्या से जूझना पड़ता है।

अत्यधिक एक स्थान पर बैठे रहने, हड्डियों के कमज़ोर होने अथवा कम शारीरिक हलचल करने के परिणाम स्वरूप लोगों के जोड़ों में दर्द होना शुरू हो जाता है। इससे निजाद पाने के लिए वीरासन का अभ्यास बेहद कारगर माना जाता है।

वीरासन की मुद्रा में बैठने के लिए घुटनों और पैरों को मोड़ना पड़ता है और दबने के कारण उनपर ज़ोर पड़ता है। दबाव की वजह से पैरों की मांसपेशियां खिंचती है जिससे घुटनों और जोड़ों का दर्द कम हो जाता है।

यह डेस्क जॉब करने वाले व्यक्तियों के लिए उत्तम आसन है। साथ ही यह पोस्चर को सुधारने में भी मदद करता है।

    इन्हे भी  पढ़ें:

  • 5 योगासना पीठ दर्द के लिए | Yogasana For Back Pain (Beginners)
  • 5 प्रभावशाली योग मुद्रा वजन घटाने के लिए-Yogasana Postures for Weight Loss

2. बवासीर – Virasana Yoga for Piles

बवासीर एक सामान्य समस्या है जोकि कई लोगों को होती है। यह पाचन तंत्र में खराबी के कारण होती है।

जब निचले मलाशय में किसी प्रकार का दबाव बढ़ता है तो गुदा के आसपास की रक्त कोशिकाएं खिंच जाती है, जिससे उनमें सूजन या उभार आ जाता है और बवासीर होने की संभावना बढ़ जाती है। यह तभी होता है जब व्यक्ति को लंबे समय से कब्ज की परेशानी हो।

वीरासन के अभ्यास से गुदा द्वार एवं शरीर के निचले भाग में रक्त संचार संतुलित तौर पर होता है, जिससे आपको बवासीर की समस्या से राहत मिल सकती है। इसके अलावा वीरासन करने से मूत्राशय संबंधी समस्याएं भी कम हो जाती हैं।

3. मासिक धर्म – Veerasana for Menstrual Problems

कई स्त्रियों को मासिक धर्म से जुड़ी अनेक परेशानियां होती हैं। इनमें से मासिक धर्म का बेवक़्त होना, ज़्यादा खून गिरना और पेट के निचले हिस्से में दर्द होना, जैसी समस्याएं काफ़ी आम हैं और यह बहुतों को होती है।

हालांकि मासिक धर्म की तकलीफों से ग्रसित महिलाएं वीरासन का अभ्यास कर सकती हैं। वीरासन करने से शरीर के निचले हिस्से में रक्त संचार सुचारू रूप से होता है, जिससे मासिक धर्म के दौरान दर्द कम हो जाता है।

जोनिवृति (Menopause) की वजह से होने वाले मूड स्विंग, कम अथवा अधिक खून गिरने की परेशानी को भी वीरासन के अभ्यास से दूर किया जा सकता है।

4. पाचन – Veerasana for Improved Digestion

वीरासन पाचन शक्ति को बढ़ाता है।

हम इस मुद्रा को करने के लिए घुटनों को मोड़ते है, इससे पेट के मध्याह्य का निचला हिस्सा उत्तेजित हो जाता है। परिणाम स्वरूप, यह हमारे पाचनतंत्र को और भी अधिक सक्रिय और क्रियाशील बना देता है और शरीर से विशाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।

यह हमारे पेट मे जगह बनाने में भी मदद करता है। इसके अभ्यास को सरल बनाने के लिए आप अपने नितंब के नीचे एक तकिया रख सकते हैं या अपने टखनों के नीचे तौलिया रोलकर रख सकते हैं। पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे अतिरिक्त वसा से भी मुक्ति मिलती है।

साथ ही यह नाभी संबंधी समस्याओं को दूर करता है और गैस की तकलीफ़ से भी छुटकारा दिलाता है।

    इन्हे भी  पढ़ें:

  • गुड़ से इन 5 बीमारियों से पीछा छुड़ाएं – Benefits of Jaggery in Hindi​
  • Chia Seeds Benefits in Hindi – चिया बीज के फायदे और उपयोग

5. पैरों का सूजन – Hero Pose or Veerasana Yoga for Swollen Legs

अधिक समय तक पैर लटकाकर बैठने से या गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पैरों में सूजन हो जाती है। यह तकलीफ़ अकसर रक्त संचार के अभाव से उतपन्न होती है।

वीरासन पैरों में सुचारू रूप से रक्त संचार होने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करता है। नसों के खिंचाव और रक्त के अभाव से पैरों में आया सूजन, वीरासन के नियमित अभ्यास से समाप्त हो जाता है। और पैर पुनः अपनी पूर्व अवस्था मे लौट आते है।

6. तनाव और थकान – Veerasana for Stress & Fatigue

योग की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि यह किसी भी प्रकार के तनाव अथवा थकान को दूर करने में असरदार होता है। ठीक उसी तरह वीरासन के अभ्यास से भी तनाव और थकान के उपर विजय पाई जा सकती है।

रोजमर्रा की परेशानियों और काम के दबाव के कारण ज्यादातर लोग तनाव और चिंता से घिरे रहते हैं। वीरासन के अभ्यास के दौरान रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी होती है, जिसकी वजह से प्राण ऊर्जा पूरे शरीर मे सुचारू रूप से फैलती है और हमें आलस, थकान, तनाव एवं अनिद्रा जैसी समस्याओं से निजाद मिलता है।

    इन्हे भी  पढ़ें:

  • SUKHASANA YOGA BENEFITS IN HINDI – सुखासन योग के प्रभावशाली फायदे
  • Scientific Meditation Benefits in Hindi – मेडिटेशन करने से मिलेंगे यह लाभ
  • शाम्भवी मुद्रा – कैसे करें और इसके लाभ: SHAMBHAVI MUDRA (IN HINDI)

7. उच्च रक्तचाप और अस्थमा – Virasan for High Blood Pressure & Asthma

रक्त संचार जब किसी कारणवश बाधित हो जाता है या सुचारू रूप से नहीं हो पाता तो हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन की समस्या उतपन्न हो जाती है।

यह हृदय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है क्योंकि इससे हृदय रोग अथवा स्ट्रोक के होने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का यह मानना है कि वीरासन का अभ्यास करने से रक्तचाप नियंत्रित और संतुलित रहता है।

इसके अलावा यह दमा के रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद होता है और इसके अभ्यास से उच्च रक्तचाप एवं दमा की समस्या से राहत मिलती है।

वीरासन कब और कितनी देर करना चाहिए? – Practice Time & Duration of Veerasana Yoga in Hindi

वीरासन करने का सबसे उत्तम समय सुबह का ही होता है। अगर घड़ी के अनुसार कहा जाए तो सुबह के 4 बजे से 6 बजे का समय सबसे अधिक लाभदायक माना जाता है।

यदि किसी कारणवश आप सुबह इसका अभ्यास न कर पाएं तो इसे शाम में भी किया जा सकता है। हालांकि वीरासन करने के लिए पेट का खाली होना आवश्यक नहीं होता पर अगर आप इसका अभ्यास अन्य योगासनों के साथ कर रहें हों तो खाने के 3 से 5 घंटे बाद ही वीरासन का अभ्यास करना उचित होता है।

साथ ही, वीरासन की मुद्रा में आप 30 से 60 सेकंड तक बने रह सकते हैं एवं इसकी अवधि को क्षमतानुसार थोड़ा और बढ़ाया जा सकता है।

वीरासन के अभ्यास से जुड़ी सावधानियां – Precautions of Veerasana Practice

कई बार हम इन आसनों से होने वाले लाभों को जानकर उत्सुक हो जाते हैं, और कुछ मत्त्वपूर्ण बातों को नजरअंदाज कर देते हैं। जिसकी वजह से हमे बाद में पछताना पड़ता है। इसलिये वीरासन करने से पहले इससे जुड़ी सावधानियों को जान लेना आवश्यक है।

  1. जिन लोगों को फेफड़ों या हृदय संबंधित रोगों की समस्या है, उन्हें वीरासन नहीं करना चाहिए।
  2. घुटनों या पैरों पर चोट लगी हो तो इसे करने का प्रयास न करें।
  3. पैरों और घुटनों को मोड़ते वक़्त जल्दबाजी न करें। इससे आपके पैरों में गंभीर मोच आ सकती है।

अंत में

वीरासन अथवा हीरो पोज़ (Hero Pose in Yoga) के नियमित अभ्यास से आपके शरीर को एक बहुत ही बेहतरीन खिंचाव मिलता है जिससे कमर और जोड़ों के दर्द की समस्या से राहत मिलती है।

यह डेस्क जॉब करने वाले लोगों के लिए बेहद असरदार और लाभदायक आसन है, जिसकी सहायता से वे अपनी व्यस्त जीवनशैली में भी योग का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

साथ ही वीरासन (Veerasana or Virasana) के अभ्यास से शरीर का बिगड़ा पोस्चर, बवासीर की समस्या तथा मासिक धर्म की तकलीफों में सुधार आता है।

मुझे उम्मीद है की आपको ये लेख – Veerasana Benefits & Steps in Hindi – वीरासन योग, फ़ायदे और विधि ” पसंद आया होगा. नीचे लगे हुए बेल आइकॉन को क्लिक करना न भूलें. इससे कोई भी नयी लेख की जानकारी आपको नोटिफिकेशन के रूप में मिल जाएगी.

Sweta Kishore

Sweta Kishore

नमस्कार! मैं एक स्वास्थ्य और फिटनेस उत्साही हूं और आप सभी की तरह एक स्वस्थ जीवन शैली चाहती हूँ। इसी कारण एक स्वस्थ जीवन को पाने के लिए काफी कुछ सीखा हे मैंने जिसे में आप सब के साथ साझा करना चाहती हूँ. मुझे उम्मीद है कि आपको यह लेख पसंद आया होगा। नीचे टिप्पणी में आप सब की अनुभाग सुनने की में उम्मीद रखती हूँ।

How To Grow Nails Faster At Home In Hindi_TopPaanch

How To Grow Nails Faster At Home In Hindi – नाखून बढ़ाने के घरेलू नुस्खे

Ashwagandha ke fayde-toppaanch

अश्वगंधा के फायदे – Ashwagandha Ke Fayde (in Hindi)

Jackfruit in Hindi-TopPaanch

कटहल के स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे – Health Benefits of Jackfruit in Hindi

Quinoa in hindi-toppaanch

Quinoa Meaning in Hindi & Amazing Benefits – किनोवा क्या हे, फायदे और उपयोग

Share